उत्तराखंड रोडवेज के कंडक्टर का बेटा बना साइंटिस्ट, भाभा ऑटोमिक रिसर्च सेंटर में पोस्टिंग

उत्तराखंड रोडवेज (uttarakhand transport corporation) में परिचालक के तौर पर कार्यरत ओमप्रकाश का बेटा वैज्ञानिक बन गया। मुश्किल हालातों के बीच बच्चों की पढ़ाई में उन्होंने कोई रुकावट नहीं आने दी।
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Image: uttarakhand transport corporation bus conductor son become scientist

नैनीताल: उत्तराखंड के नैनीताल जिले के हल्द्वानी निवासी ओमप्रकाश के बेटे उत्कर्ष ने ये साबित करदिया कि अगर ठान को तो कुछ भी नामुमकिन नहीं है। उत्तराखंड रोडवेज बस (uttarakhand transport corporation) में परिचालक के तौर पर कार्यरत ओमप्रकाश के बेटे ने पिता का सिर गर्व से ऊँचा करदिया है। उत्कर्ष भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर bhabha atomic research centre में वैज्ञानिक हैं। उनकी सफलता के पीछे उनकी मेहनत और लगन के साथ-साथ उनके पिता की भी बहुत अहम भूमिका रही है। माता-पिता के लिए सबसे गौरवशाली पल वो होता है जब उनके बच्चे पढ़-लिख कर अपने पैरों पर खड़े हो जाते हैं। किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले ओमप्रकाश ने बचपन में ही पिता का साया उठ जाने के कारण

उत्तराखंड रोडवेज में परिचालक के तौर पर काम करना शुरु किया। दिन-रात बस के अंदर टिकट काटते हुए जीवन व्यतीत कर देने वाले ओमप्रकाश ने अपने बच्चों के ऊपर कभी भी इस चीज़ का असर नहीं पड़ने दिया। हर पिता की तरह उन्होंने भी बच्चों की पढ़ाई के पीछे जी-जान लगा दी। आगे पढ़िए

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भले ही पिता उत्तराखंड रोडवेज (uttarakhand transport corporation) की बस में कंडक्टर रहे लेकिन अपने बेटे और बेटियों को हमेशा बेहतरीन शिक्षा प्रदान करवाई। उनके बेटे उत्कर्ष ने ऐसी हालातों में पढ़-लिख कर और वैज्ञानिक बनकर यह साबित करदिया है कि अगर मन में लगन हो तो कुछ भी मुश्किल नहीं है। हम वो सब पा सकते हैं जो हम पाना चाहते हैं। ओमप्रकाश जी ने जीवन में बच्चों की शिक्षा को लेकर जो त्याग और मेहनत करी है उसी का फल है कि आज उनका बेटा भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर bhabha atomic research centre में वैज्ञानिक बन चुका है।उन्होंने अपने बच्चों की पढ़ाई में कभी कोई रुकावट नहीं आने दी। मेहनत करके बच्चों को पढ़ाया और इसी का परिणाम है कि आज वे गर्व से कह सकते हैं कि उनका बेटा वैज्ञानिक बन गया है। उन्होंने उत्कर्ष के इंटर तक कि पढ़ाई नैनीताल रोड स्थित बीरशिबा से करवाई। ततपश्चात उन्होंने उत्कर्ष को देहरादून से बीटेक करवा के मुंबई से एमटेक करवाया। एमटेक करने के बाद उत्कर्ष ने बतौर वैज्ञानिक भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र से जुड़े। आज उत्कर्ष ने अपने पिता के द्वारा किये गए त्याग को निरर्थक नहीं जाने दिया और ये साबित कर दिया कि हालात भले ही मुश्किल क्यों न हों, अगर मन में लगन है तो सब कुछ कर पाना मुमकिन है।
खबर साभार-devbhoomidarshan17