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भीड़ से दूर, स्वर्ग के सबसे पास – केदार हिमालय के Hidden Treks
बुग्याल, हिमालयी वन और बर्फीली चोटियों का अद्भुत नज़ारा। आध्यात्म, रोमांच और एकांत का अनोखा संगम।
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अल्मोड़ा: पहाड़ की बेटियां अपनी मेहनत और हौसले से पहाड़ में रहकर तरक्की और विकास के रास्ते तैयार कर रही हैं। ऐसी ही होनहार बेटी हैं अल्मोड़ा की मंजू रौतेला शाह (Manju rautela shah) । मंजू रौतेला बेकार समझी जाने वाली चीजों में जान फूंकने का काम करती हैं। वो पिरुल से कलाकृतियां बनाती हैं। साल 2019 में उन्हें कोलकाता में बेस्ट अपकमिंग आर्टिस्ट अवॉर्ड से नवाजा गया। ये अवॉर्ड उन्हें इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल की तरफ से दिया गया। चलिए अब आपको मंजू रौतेला शाह के सफर के बारे में बताते हैं। साल 2009 में मंजू रौतेला का विवाह मनीष कुमार साह के साथ हुआ। वो पति के साथ द्वाराहाट के हाट गांव में रहने लगीं। यहां आकर उन्होंने देखा कि गांव में जहां देखो वहां पिरुल यानि Pine Needle बिखरी पड़ी हैं। इसका कोई इस्तेमाल भी नहीं होता। यहीं उनके दिमाग में एक आइडिया आया और उन्होंने पिरुल इकट्ठा करना शुरू कर दिया। इससे फूलदान, टोकरी, कटोरियां और साजो-सज्जा का सामान बनाने लगीं। आगे पढ़िए...