पहाड़ की बसंती राणा को सलाम, डेढ़ हजार महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा..दिखाई तरक्की की राह

किसने सोचा था कि गांव की सामान्य सी महिला एक दिन डेढ़ हजार महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ेगी, उन्हें आत्मनिर्भर बनाएगी, लेकिन बसंती राणा ने ये कर दिखाया। आगे पढ़िए पूरी खबर
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Trails once used by sages, locals, and shepherds. Ideal for travelers seeking silence over social media fame.

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Basanti rana: Story of basanti Rana uttarakhand
Image: Story of basanti Rana uttarakhand

नैनीताल: इस दुनिया में असंभव कुछ भी नहीं। हम वो सब कर सकते हैं, जो हम सोच सकते हैं और हम वो सब सोच सकते हैं, जो हमने आज तक नहीं सोचा। इस पंक्ति को अगर हकीकत में साकार होते देखना है तो हल्द्वानी चले आइए। जहां कर्मठ बसंती राणा सैकड़ों महिलाओं को स्वरोजगार का पाठ पढ़ा रही हैं। उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होना सिखा रही हैं। किसने सोचा था कि गांव की एक सामान्य सी महिला एक दिन डेढ़ हजार महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ेगी, उन्हें आत्मनिर्भर बनाएगी, लेकिन ऐसा हो रहा है। पनियाली गांव की रहने वाली बसंती राणा पिछले चार साल से महिलाओं को आत्मनिर्भर और स्वाभिमानी बनने का अवसर दे रही हैं।

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यही नहीं उनके प्रयासों से पहाड़ के उत्पादों को बाजार मिल रहा है। बसंती सरस मार्केट में हिलांस मार्ट के नाम से आउटलेट का संचालन करती हैं। जिसमें महिलाओं के द्वारा तैयार उत्पादों के साथ गहथ, भट्ट, पहाड़ी राजमा, मोठ, मंडुवा, बाजरा और आंवला समेत कई तरह के पर्वतीय उत्पादों की बिक्री की जाती है। इस सफर की शुरुआत कैसे हुई, ये भी बताते हैं। बसंती बताती हैं कि साल 2016 में वो एक खुली बैठक में हिस्सा लेने गई थीं। वहां स्वरोजगार को लेकर चर्चा हो रही थी। यहीं पर बसंती ने पहली बार अपना काम शुरू करने की सोची। उन्होंने कुछ महिलाओं को जोड़ कर वैष्णवी स्वयं सहायता समूह बनाया। धीरे-धीरे काम चल निकला। आज बसंती देवी हल्द्वानी के 15 ग्राम संगठनों के लिए सीनियर कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन के तौर पर काम कर रही हैं।

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इन संगठनों से डेढ़ हजार महिलाएं जुड़ी हुई हैं। बसंती इन महिलाओं को ट्रेनिंग देती हैं, फिर उनके द्वारा तैयार उत्पादों को बाजार मुहैया कराती हैं। बसंती कहती हैं कि अब महिलाएं खाद्य सामग्री के साथ ही शहद और मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में भी काम करने लगी हैं। समूहों द्वारा एलईडी बल्ब तक बनाए जाते हैं। बसंती कहती हैं कि शिक्षित हो या अनपढ़, लेकिन हर महिला में कोई न कोई हुनर जरूर होता है। बस महिलाओं को जागरूक करने और उनकी झिझक तोड़ने की जरूरत है। इस काम में उन्हें प्रशासन खासकर डीएम सविन बंसल का भी खूब सहयोग मिला। डीएम सविन बंसल महिला स्वयं सहायता समूहों की मदद कर रहे हैं। जिससे महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने में मदद मिल रही है।