चमोली आपदा: 3 महीने पहले हुई शादी, सैलाब में खो गया पति..अब दर-दर भटक रही है मधुमिता

लालू और मधुमिता की शादी को अभी तीन महीने ही हुए थे। दोनों हंसी-खुशी जिंदगी बिता रहे थे, लेकिन बीते हफ्ते आई आपदा ने मधुमिता की हर खुशी छीन ली।
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chamoli disaster: Chamoli disaster story of Madhumita
Image: Chamoli disaster story of Madhumita

चमोली: चमोली में त्रासदी ने कई लोगों की जिंदगी को निगल लिया। चंद सेकेंड में सैकड़ों लोगों की जिंदगी ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। जिन लोगों ने अपने कलेजे के टुकड़ों को आपदा में गंवा दिया, वो लोग दिल पर पत्थर रखकर इस सच को स्वीकारने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कई लोग ऐसे भी हैं जिनके अपनों की आपदा के बाद से कोई खबर नहीं। ये लोग जिंदा हैं या प्रकृति की विनाशलीला की भेंट चढ़ गए, कुछ पता नहीं। कोलकाता की रहने वाली मधुमिता भी ऐसे ही दर्द का सामना कर रही है। बीते हफ्ते आया तबाही का सैलाब मधुमिता के पति लालू को अपने साथ बहा ले गया। लालू और मधुमिता की शादी को तीन महीने ही हुए थे, लेकिन अब काल के गाल में समाया लालू मधुमिता को बेसहारा छोड़कर चला गया है। लालू कोलकाता का रहने वाला था और तपोवन परियोजना में मजदूरों की सप्लाई करता था। बीते साल नवंबर में उसकी शादी मधुमिता से हुई। जिसके बाद दोनों पति-पत्नी तपोवन आ गए और यहां हंसी-खुशी जिंदगी बिताने लगे, लेकिन इनकी खुशियों को न जाने किसकी नजर लग गई।

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7 फरवरी को जब ऋषि गंगा में बाढ़ आई तो लालू तपोवन बैराज के पास ही था। देखते ही देखते वो सैलाब के साथ बह गया। जब मधुमिता को पति के बह जाने की खबर मिली तो वो बदहवास होकर गिर पड़ी। बाद में जब होश आया तो रोती-बिलखती मधुमिता बैराज क्षेत्र में पहुंची और पति को ढूंढने लगी। एक हफ्ते से मधु बैराज और सुरंग साइट पर अपने पति की खोज में भटक रही है। मधु का देवर और परिजन भी कोलकाता से तपोवन पहुंच गए हैं और लालू की तलाश कर रहे हैं। मधु जैसे और भी कई लोग हैं, जो आपदा के दौरान लापता हुए अपनों के लौट आने का इंतजार कर रहे हैं। तपोवन स्थित सुरंग में फंसे 24 वर्षीय अभिषेक की बड़ी बहन को भी भाई के लौट आने का इंतजार है। अभिषेक तपोवन परियोजना में इंजीनियर था। आपदा के बाद से उसकी मां पीतांबरी देवी के आंसू नहीं थम रहे हैं। वो चारपाई पर निढाल पड़ी हैं और उठ भी नहीं पा रहीं। अभिषेक के पिता ऋषि प्रसाद भी गुमसुम हैं। ये लोग अपनों की सलामती के लिए प्रार्थना कर रहे हैं, लेकिन जैसे-जैसे वक्त गुजर रहा है, परिजनों का धैर्य भी जवाब देने लगा है।