राज्य में इस वक्त 964 जगहों पर जंगलों में आग लगी हुई है। आग लगने से अब तक 1291 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हो चुका है। 4 लोगों और 7 मवेशियों की मौत भी हुई है।
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Komal Negi
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Image: 4 people died in jungle fire uttarakhand
अल्मोड़ा: उत्तराखंड इस वक्त कोरोना संक्रमण के साथ-साथ एक और बड़े संकट से गुजर रहा है। यहां सूखे के चलते जंगल के जंगल धधक रहे हैं। आमतौर पर जंगलों में आग लगने की घटनाएं गर्मी में सामने आती हैं, लेकिन इस बार ये सिलसिला सर्दी के साथ ही शुरू हो गया था, जो कि अब भी जारी है। प्रदेश में आग लगने से अब तक 1291 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हो चुका है। आग लगने से न सिर्फ वन संपदा को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि इंसानों और मवेशियों की जान भी जा रही है। प्रदेश में लगातार हो रही वनाग्नि की घटनाओं में सात जानवरों और चार लोगों की मौत हुई है। इसकी पुष्टि खुद उत्तराखंड के वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने की है।
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जंगलों में भड़की आग पर काबू पाने के लिए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बातचीत की थी। रविवार को गृह मंत्री ने हेलीकॉप्टर और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीमों को तत्काल प्रभाव से प्रदेश भेजने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने मामले को लेकर इमरजेंसी बैठक भी बुलाई। सीएम ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वन महकमे के अफसरों व कर्मचारियों के अवकाश पर रोक लगा दी है। फायर वॉचरों को भी जंगलों में 24 घंटे निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कहा कि जंगलों में भड़की आग पर काबू पाने में कहीं कोई संवादहीनता न रहे, इसके लिए राज्य के अफसरों को केंद्र से लगातार समन्वय बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
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बता दें कि राज्य में इस वक्त 964 जगहों पर जंगलों में आग लगी हुई है। वन मंत्री हरक सिंह रावत ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि जंगल की आग की चपेट में आने से 4 लोगों की मौत हुई है। दो लोग झुलस गए हैं। सात जानवरों के मारे जाने की भी सूचना है। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत और मैं इस पर नजर बनाए हुए हैं। चिंता की बात ये है कि अभी गर्मी के मौसम की शुरुआत है, लेकिन हालात बेकाबू होने लगे हैं। पिछले दो दिन में अल्मोड़ा क्षेत्र के अंतर्गत जंगलों में आग लगने की नौ घटनाएं सामने आ चुकी हैं। एसडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंच कर बचाव और राहत कार्य में जुट रही हैं।