Advertisement
ऋषियों का मार्ग: केदार हिमालय के इन ट्रेक्स पर शोर नहीं, सिर्फ मंत्र सुनाई देते हैं
प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
Example Ads Media
चम्पावत: किसी ने सच ही कहा है, संघर्ष जितना कठिन हो, सफलता उतनी ही शानदार होगी। अब चंपावत की रहने वाली रेनू बोरा को ही देख लें। मार्शल आर्ट के क्षेत्र में पहचान बनाने के लिए इस बेटी को न जाने कितने संघर्षों से गुजरना पड़ा। तमाम तरह की परेशानियां झेलनी पड़ीं, लेकिन रेनू को आखिरकार अपना मुकाम मिल ही गया। राष्ट्रीय स्कूल गेम्स में दो बार पदक जीतने वाली रेनू बोहरा को नेशनल कराटे एकेडमी इंडिया ने हल्द्वानी का कोच नियुक्त किया है। पहाड़ की ये होनहार बेटी अब दूसरी प्रतिभाशाली बेटियों के हुनर को तराशने का काम करेगी। रेनू बोरा मूलरूप से चंपावत की रहने वाली हैं। बचपन से ही मुफलिसी में पली-बढ़ी रेनू इस वक्त हल्द्वानी में अपनी मां नीलावती देवी के साथ किराए के कमरे में रहती हैं। रेनू के पिता जोत सिंह पोस्टमैन थे। परिवार में आर्थिक तंगी थी, लेकिन उन्होंने इसे बिटिया की सफलता के आड़े नहीं आने दिया। उन्होंने रेनू को मार्शल आर्ट में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। पिता से मिले सहयोग के दम पर रेनू ने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। वो 59वें राष्ट्रीय स्कूल गेम्स में स्वर्ण पदक हासिल करने में सफल रहीं। इसके बाद उन्होंने 60वें राष्ट्रीय स्कूल गेम्स में कांस्य पदक जीता। आगे पढ़िए