1989 में इंटरव्यू में प्रथम आने वाले शिक्षक जेरॉल्ड जॉन को 30 सालों के बाद आखिरकार प्रवक्ता के पद पर नियुक्ति मिल गई है। उत्तराखंड के साथ उत्तर प्रदेश को भी शिक्षक को हर्जाना देना होगा। जानिए यह रोचक मामला-
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अनुष्का
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Image: Uttarakhand teacher John Gerald case
नैनीताल: अक्सर सुनने में आता है कि अपने हक की लड़ाई तब तक लड़ो जब तक आप सही साबित न हो जाओ। चाहे उसमें कितना भी वक्त क्यों न लगे। अपने हक के लिए हमेशा लड़ो और अगर आप सच्चे हो तो भले ही देरी से मगर आपको जीत जरूर मिलेगी। ऐसा ही कुछ उत्तराखंड में भी देखने को मिला है जहां पर एक शिक्षक को आखिरकार तमाम उतार-चढ़ाव देखने के बाद और संघर्ष के बाद इंटरव्यू क्लियर करने के 30 साल के बाद नौकरी मिली है। सरकार को शिक्षक के संघर्ष के आगे घुटने टेकने पड़े। शिक्षक ने 30 साल तक अपने हक के लिए लड़ाई लड़ी और आखिरकार उनको नौकरी मिल गई है। अब उत्तराखंड के साथ ही उत्तर प्रदेश को भी इंटरव्यू के 30 सालों के बाद नौकरी पाने वाले सीएनआई इंटर कॉलेज के शिक्षक जेरॉल्ड जॉन को हर्जाना देना होगा और उनके वेतन भत्तों को चुकाना होगा। उत्तराखंड राज्य सरकार ने यूपी शिक्षा विभाग को शिक्षक जॉन के 1990 से लेकर 8 नवंबर 2000 तक के बिल भेजते हुए उनका भुगतान करने को कहा है और यूपी के शिक्षा विभाग ने इस पूरे मामले में संज्ञान लेते हुए तत्काल रूप से इस पर कार्यवाही शुरू कर दी है और जल्द ही शिक्षक जॉन को उनके हक का पैसा वापस मिलेगा। शिक्षा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने यूपी के प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा को शिक्षक जॉन के 20 सालों के वेतन भत्तों का बिल भेजते हुए उनको जल्द से जल्द इसका भुगतान करने का अनुरोध किया है। आप यह जानकर हैरान रह जाएंगे कि यह राशि तकरीबन 6 लाख 87 हजार रुपए है। अब आप सोचेंगे कि आखिर एक शिक्षक ने 30 साल पहले इंटरव्यू दिया था तो अब तक उनकी ज्वाइनिंग क्यों नहीं हुई और आखिर यह मामला कोर्ट तक कैसे पहुंचा। यह मामला फिलहाल काफी चर्चित चल रहा है। चलिए आपको इस रोचक और दिलचस्प मामले से अवगत कराते हैं।
दरअसल यह बात आज से तकरीबन 30 साल पुरानी 1989 की है जब देहरादून के सीएनआई इंटर कॉलेज में वाणिज्य प्रवक्ता की पोस्ट निकली थी जिसमें इंटरव्यू के राउंड में शिक्षक जेरॉल्ड जान टॉपर रहे थे मगर शिक्षा विभाग ने उनको नियुक्ति नहीं दी थी क्योंकि उनको शॉर्टहैंड का ज्ञान नहीं था। मगर इंटरव्यू में दूसरे नंबर पर रहे अशोक शर्मा को शिक्षा विभाग ने प्रवक्ता के पद पर नियुक्ति दे दी थी। मेरिट में उनका पहला नंबर था मगर नौकरी मिली दूसरे शिक्षक को। अपने साथ हुए इस अन्याय के खिलाफ शिक्षक जॉन ने आवाज उठाई और अपने हक की लड़ाई लड़ने के लिए उन्होंने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे खटखटाए। बीते 30 सालों से वे अपने हक की लड़ाई लड़ रहे थे और अपना हक पाने की खातिर उन्होंने 30 साल काफी संघर्ष किया। इतने लंबे समय के बाद आखिरकार उनको सफलता मिली है। वे 30 सालों से अपने साथ हो रही इस नाइंसाफी खिलाफ जंग लड़ रहे थे और उनके हौसले और हिम्मत के आगे राज्य सरकार को भी सिर झुकाना पड़ा। 1989 में इंटरव्यू राउंड में प्रथम आने वाले जॉन को 30 सालों के बाद आखिरकार वो नौकरी मिली जो नौकरी उनको 1989 में मिल जानी चाहिए थी। शिक्षा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम के आदेश के बाद जॉन को सीएनआई बॉयज इंटर कॉलेज में कॉमर्स के प्रवक्ता के रूप में ज्वाइन करवाया गया है। कॉलेज के प्रधानाचार्य जीबी पॉल का कहना है कि जेरोल्ड जॉन को उनके कॉलेज में कॉमर्स के प्रवक्ता के पद पर नियुक्ति मिल गई है।
1989 में अपने साथ हुए इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने वाले शिक्षक जॉन ने 30 साल के लंबे समय के दौरान काफी उतार-चढ़ाव झेले मगर उन्होंने अपने हक की लड़ाई लड़ना बंद नहीं किया और आखिरकार उनको सफलता मिली। 1989 में योग्य होने के बावजूद उनको नकारा गया जिसके बाद उन्होंने कोर्ट में शरण ली। एक बार हाईकोर्ट में हार का सामना करने पर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और 26 सितंबर 2018 को हाईकोर्ट ने उनका दावा सही पाते हुए सरकार को उन को नियुक्ति देने के आदेश दिए और इसी के साथ में 1989 से लेकर अब तक तकरीबन डेढ़ करोड़ रुपए का हर्जाना देने के निर्देश भी दिए जिसके बाद सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने कोर्ट के आदेश के अनुसार उन को नियुक्ति देने के आदेश दे दिए हैं और इसी के साथ उन्होंने यूपी के प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा को भी शिक्षक जॉन के वेतन भत्तों का बिल भेजते हुए उनको भुगतान करने का अनुरोध किया है।