देवभूमि को प्रकृति का वरदान, समय से पहले ही खिल गया महादेव का प्रिय पुष्प ब्रह्मकमल

उत्तराखंड में ब्रह्मकमल की 28 प्रजातियां पाई जाती हैं। यह पुष्प आस्था से जुड़ा होने के साथ ही औषधीय गुणों से भरपूर है।
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Image: Brahma Kamal blooms prematurely in Kedarnath

रुद्रप्रयाग: केदारनाथ धाम में खिला राज्य पुष्प ब्रह्मकमल इन दिनों श्रद्धालुओं के बीच कौतूहल का विषय बना हुआ है।

Brahma Kamal blooms prematurely in Kedarnath

ब्रह्मकमल को भगवान शिव का सबसे प्रिय पुष्प माना जाता है। यही वजह है कि शिवभक्त अपने आराध्य को श्रावण मास में यही पुष्प अर्पित करते हैं। इस बार यह केदारनाथ धाम में समय से पहले ही खिल गया है। राज्य पुष्प ब्रह्मकमल आमतौर पर जुलाई और अगस्त के महीने में खिलता है, लेकिन केदारनाथ धाम के रामानंद आश्रम में यह समय से पहले मई में ही खिल गया है। केदारनाथ धाम के रामानंद आश्रम में ललित राम दास महाराज के प्रयासों से उनके बगीचों में ब्रह्मकमल के करीब 124 पौधे लगे हैं। बीते तीन साल से वह ब्रह्मकमल को अपने आश्रम में संरक्षित कर रहे हैं। केदारनाथ की ऊंची पहाड़ियों में ब्रह्मकमल के दर्शन जुलाई और अगस्त में होते हैं, लेकिन इस बार मई में ही केदारनाथ में पहला ब्रह्मकमल स्वामी ललित राम महाराज के बगीचे में खिला है।

ललित महाराज ने कहा कि ब्रह्मकमल को वो बाबा केदार के चरणों में अर्पित करेंगे। ललित महाराज की बाबा केदार में अगाध श्रद्धा है और वो पूरे साल केदारनाथ में ही रहकर भोले बाबा की पूजा करते हैं। चलिए अब आपको ब्रह्मकमल पुष्प की खासियत बताते हैं। इसे देवपुष्प भी कहते हैं। ब्रह्मकमल उच्च हिमालयी क्षेत्र में समुद्रतल से 3000 मीटर से लेकर 4800 मीटर तक की ऊंचाई पर खिलता है। मान्यता है कि जिस घर में ब्रह्मकमल होता है, वहां सांप नहीं आते। भगवान शिव और माता पार्वती को ब्रह्मपुष्प अत्यंत प्रिय है। इसलिए हर साल नंदाष्टमी के दिन लोकदेवी मां नंदा को ब्रह्मकमल अर्पित किए जाने की परंपरा है। ब्रह्मकमल सफेद और हल्का पीला रंग लिए होता है। उत्तराखंड में इसकी 28 प्रजातियां पाई जाती हैं। यह पुष्प आस्था से जुड़ा होने के साथ ही औषधीय गुणों से भरपूर है।