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No reels. No crowds. Just Kedar Himalaya - This trek doesn’t want to be famous..
Alpine meadows, dense forests, and snow-capped peaks in one journey. Suitable for both beginner and experienced trekkers.
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ऐसा माना जा रहा है कि परीक्षा एक बार फिर से हो सकती है। मगर इससे उन अभ्यार्थियों के बीच में साफ तौर पर आक्रोश झलक रहा है जिन्होंने बिना किसी नकल के अपनी मेहनत के दम पर यह परीक्षा पास की। वैसे ही उत्तराखंड में बेरोजगारी की कमी नहीं और इसमें उत्तराखंड के नौजवानों का किसी सरकारी नौकरी में चयन होना युद्ध जीतने से कम नहीं है। लेकिन अगर चयन के बाद हाथ लगी नौकरी पर फिर संकट घिर जाए तो इससे दुखदाई कुछ और नहीं हो सकता। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की भर्ती परीक्षा के पेपर लीक होने के बाद आज कुछ ऐसी ही परिस्थिति देखने को मिल रही है। प्रदेश में पिछले कुछ सालों से हाकम सिंह रावत जैसे माफियों ने सरकारी नौकरियों को जैसे धंधा बना लिया है और ऐसे ही लोगों के कारण नौकरियां बिकने लगी हैं। प्रधान व जिला पंचायत सदस्य तो लाखों रुपये देकर नौकरी पा गए जबकि वर्षों से मेहनत करने वाले नौजवान अब भी धक्के खा रहे हैं। इस बार भी कुछ ऐसा ही हो रहा है जिन बच्चों की नौकरी अपने दम पर लगी है उनकी नौकरी भी खतरे में है। ऐसे में उन बच्चों ने आयोग पर सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।
भूतपूर्व सैनिक कोटे से स्नातक की परीक्षा पास करने वाले प्रवीन असवाल ने कहा कि उन्होंने मेहनत से नौकरी हासिल की है, यदि पेपर लीक हुआ है तो इसके लिए आयोग जिम्मेदार है।यदि सरकार इस भर्ती को रद्द करने का निर्णय लेती है तो इससे पहले पूर्व में हुई भर्तियां रद्द हों, क्योंकि नकल माफिया आज से नहीं पुरानी भर्तियों से ही नकल करवाकर परीक्षा पास करवा रहे हैं। वहीं चिन्यालीसौड उत्तरकाशी निवासी आनंद पाल ने बताया कि उन्होंने देहरादून में किराए पर कमरा लेकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी की। नौकरी पाने के लिए उन्हें नौ साल लग गए। स्नातक परीक्षा में उनकी आरक्षित कोटे में चौथी रैंक आई है, लेकिन अब जब नौकरी मिली है तो उस पर विवाद हो गया है। वहीं सतपुली पौड़ी गढ़वाल निवासी अजय सिंह ने बताया कि स्नातक परीक्षा में उन्होंने 21वीं रैंक हासिल की है। इसके लिए उन्होंने वर्षों मेहनत की। अब यदि पेपर लीक का मामला सामने आ रहा है तो इसमें उनका क्या कसूर है। वहीं थराली चमोली निवासी महेशानंद जोशी ने बताया कि उन्होंने मेहनत के बल पर परीक्षा में 38वीं रैंक हासिल की। ट्यूशन पढ़ाकर उन्होंने खुद की भी तैयारी की। अब जब उनके स्वजनों का सपना साकार हुआ तो भर्ती फिर से UKSSSC Paper Leak की वजह से विवादों में आ गई है। यदि सरकार को कार्रवाई करनी ही है तो शुरू से हुई भर्तियों को रद्द किया जाए, क्योंकि यह पहली बार नहीं है जब पेपर लीक हुआ हो।