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Untouched Trekking Routes in Kedar Himalaya, Uttarakhand
Lesser-known treks offering breathtaking Himalayan views. A perfect blend of adventure, solitude, and spirituality.
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देहरादून: फरवरी की शुरुआत में तुर्की और सीरिया में जो भयानक भूकंप आया, उत्तराखंड को उससे सबक लेने की जरूरत है। तमाम वैज्ञानिक संस्थान कई बार ये भविष्यवाणी कर चुके हैं कि उत्तराखंड पर मेगा अर्थक्वैक का खतरा मंडरा रहा है।
अब रुड़की समेत तीन आईआईटी भूकंप वैज्ञानिकों ने अपने शोध में बड़ा खुलासा किया है। इसके अनुसार अगर हिमालयी क्षेत्र में बड़ा भूकंप आया तो मसूरी में 1054 और नैनीताल में 1447 करोड़ का नुकसान होगा, भारी तबाही मचेगी। मैदानी क्षेत्र में यह नुकसान मसूरी की तुलना में 200 करोड़ और नैनीताल की तुलना में 100 करोड़ कम होगा। जनवरी 2019 में एमएचआरडी भारत सरकार ने इंप्रिंट-2 स्कीम के तहत ‘नेक्स्ट जेनरेशन अर्थक्वेक लॉस एस्टीमेशन टूल फॉर हिली रिजन’ नाम का एक प्रोजेक्ट आईआईटी रुड़की, आईआईटी रोपड़, मालवीय नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी जयपुर और नोएडा की रिस्क मैनेजमेंट सॉल्यूशन को दिया था। आईआईटी रुड़की ने आने वाले 50 वर्षों में बड़े और अपेक्षाकृत कम तीव्रता के भूकंप में हिमालयी क्षेत्र में होने वाले भवनों के नुकसान का आकलन किया है। आगे पढ़िए
शोध के दौरान पता चला कि मसूरी में बड़ा भूकंप आया तो करीब 1054 करोड़ का नुकसान होगा। जबकि कम तीव्रता वाले भूकंप में यह नुकसान 229.97 करोड़ होगा। मैदानी क्षेत्र में बड़े भूकंप में 854 करोड़ और कम तीव्रता के भूकंप में 159 करोड़ का नुकसान होगा। इसी तरह नैनीताल में बड़े भूकंप में नुकसान 1447 करोड़ और कम तीव्रता के भूकंप में 271 करोड़ का नुकसान होगा। आईआईटी के वैज्ञानिक प्रो. योगेंद्र सिंह ने बताया कि विकसित की गई तकनीक से हिमालय के किसी भी शहर में भूकंप से होने वाले नुकसान का आसानी से आकलन किया जा सकता है। शोध के तहत मसूरी के 5101 और नैनीताल के 7793 भवनों का सर्वे किया गया। बता दें कि नेशनल जियो फिजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (NGRI) के वैज्ञानिक डॉ. पूर्णचंद्र राव ने भी दावा किया है कि हिमालय क्षेत्र में जल्द ही बड़ा भूकंप आ सकता है। रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 8 रह सकती है, जिससे भारी तबाही हो सकती है। हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि संरचनाओं को मजबूत करके जान-माल के नुकसान को कम किया जा सकता है।