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जहां आज भी सिर्फ चरवाहे जाते हैं – केदार हिमालय के अनदेखे ट्रेक्स
प्रकृति, शांति और हिमालय – केदार के गुप्त ट्रेक्स.. यहां कदम रखते ही बदल जाती है सांस और सोच – Hidden Kedar Trails
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देहरादून: सैन्य बहुल उत्तराखंड में पूर्व सैनिक बड़ी तादाद में रहते हैं। हाल में इनकी एक बड़ी समस्या का समाधान कर दिया गया।
अब पूर्व सैनिकों के लिए सामान खरीदने के लिए सीएसडी या अपनी यूनिट की कैंटीन जाने की बाध्यता नहीं होगी। वह किसी भी सैन्य यूनिट की कैंटीन में जाकर ग्रॉसरी और लिकर खरीद सकेंगे। कैंटीन कार्ड धारको के लिए एएफडी-1 श्रेणी के सामान ऑर्डर करने के लिए afd.csdindia.gov.in पोर्टल लांच किया गया है। जहां वो ऑनलाइन खरीदारी कर सकते हैं। इसके अलावा नए कार्ड बनाने की प्रक्रिया भी सरल कर दी गई है। पूर्व सैनिकों को ग्रॉसरी और लिकर दोनों कैटेगरी में एक साथ 2 महीने का कोटा उठाने का विकल्प भी दिया गया है। सेना मुख्यालय ने बीते 6 जून को कैंटीन से खरीदारी को लेकर संशोधन आदेश जारी किया।
इसके तहत पूर्व सैनिक और सैन्य आश्रितों के लिए अब अपनी यूनिट की कैंटीन जाने की बाध्यता नहीं होगी। कैंटीन कार्ड हर साल रिन्यू कराने की बाध्यता भी हटा दी गई है। नए कार्ड बनाने की प्रक्रिया सरल की गई है। सेना के जनसंपर्क अधिकारी, देहरादून लेफ्टिनेंट कर्नल मनीष श्रीवास्तव ने सीएसडी नियमों में बदलाव के आदेश की पुष्टि की है। प्रशिक्षु अफसर भी अब हर महीने 5 हजार रुपये तक की ग्रॉसरी सीएसडी से खरीद सकेंगे। अग्निवीरों के स्टील कार्ड बनाए जाएंगे। सैन्य संस्थानों जैसे कि सैनिक स्कूल, मिलिट्री स्कूल और आरआईएमसी के छात्रों के स्टील कार्ड बनाए जाएंगे। वे हर महीने कैंटीन से 3500 रुपये तक की खरीदारी कर सकेंगे। नवनियुक्त अग्निवीरों को ट्रेनिंग पूरी करने के बाद सामान्य ग्रॉसरी और लिकर कार्ड ट्रेनिंग सेंटर से जारी किया जाएगा।