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जहां आज भी सिर्फ चरवाहे जाते हैं – केदार हिमालय के अनदेखे ट्रेक्स
प्रकृति, शांति और हिमालय – केदार के गुप्त ट्रेक्स.. यहां कदम रखते ही बदल जाती है सांस और सोच – Hidden Kedar Trails
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देहरादून: मसूरी वासियों की बरसों पुरानी साध पूरी हो गई। गुरुवार का दिन मसूरी के लिए यादगार लम्हा लेकर आया। पहाड़ों की रानी मसूरी को बीते 200 सालों में पहली बार पूर्ण तहसील का दर्जा मिला है।
राज्य सरकार के इस फैसले से मसूरी के विकास को रफ्तार मिलेगी। आम लोगों और व्यापारियों को फायदा होगा। तहसील बनने से अब लोगों को अपने जरूरी काम के लिए राजधानी के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। शहर के लोग लंबे वक्त से मसूरी को तहसील बनाने की मांग कर रहे थे। गुरुवार को कैबिनेट मीटिंग में मसूरी को तहसील बनाने के प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई। इस बात की खबर मिलते ही मसूरी में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। लोगों ने सरकार के फैसले का स्वागत किया और सरकार का आभार जताया। यहां आपको मसूरी की स्थापना के इतिहास के बारे में भी बताते हैं। इतिहासकार जयप्रकाश उत्तराखंडी ने बताया कि मसूरी की स्थापना के दो सौ सालों में ये शहर कभी पूर्ण तहसील नहीं बन सका। आगे पढ़िए
ब्रिटिश काल में मेरठ से कमिश्नरी संचालित होती थी। साल 1840 में शहर में मजिस्ट्रेट की तैनाती हो गई थी। यहां वो हर सुविधा दी गई, जो अंग्रेजों को इंग्लैंड में मिलती थी। साल 1850 में अंग्रेजों ने मसूरी सिटी बोर्ड का गठन किया था। अब राज्य सरकार ने मसूरी को तहसील का दर्जा दिया है। शहर के लोग लंबे वक्त से मसूरी को तहसील (mussoorie full tehsil status) घोषित करने की मांग कर रहे थे। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी मसूरी ने भी इसके लिए पुरजोर समर्थन दिया था। मसूरी के तहसील बनने से शहर के लोगों को काफी सहूलियत मिलेगी और शहर की प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होगी। कैबिनेट के फैसले से बड़ी आबादी को लाभ मिलेगा। बीजेपी समेत तमाम राजनीतिक संगठनों ने कैबिनेट के फैसले पर खुशी जताई। व्यापारी संगठनों ने भी राज्य सरकार का आभार जताया है।