चमोली के गैरसैंण क्षेत्र में बीमार 61 वर्षीय बलवंत सिंह को गांव की महिलाओं ने करीब 4 किलोमीटर डोली में उठाकर सड़क तक पहुंचाया। अस्पताल पहुंचाने के बाद भी उनकी जान नहीं बच सकी
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: Women Carry Sick Man 4 Km Due to No Road in Gairsain
चमोली: उत्तराखंड के पहाड़ी गांवों में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की चुनौती एक बार फिर सामने आई है। चमोली जिले के गैरसैंण विकासखंड के कुनीगाड़ क्षेत्र के गोगनाणी गांव में 61 वर्षीय बीमार बलवंत सिंह को अस्पताल पहुंचाने के लिए गांव की महिलाओं को करीब चार किलोमीटर तक डोली कंधे पर उठाकर पैदल चलना पड़ा। सड़क तक पहुंचाने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब गोगनाणी समेत आसपास के गांव लंबे समय से सड़क सुविधा की मांग कर रहे हैं।
Women Carry Sick Man 4 Km Due to No Road in Gairsain
गोगनाणी तोक निवासी बलवंत सिंह पेंटर का काम कर परिवार चलाते थे। वह अपनी पत्नी देवकी देवी और दिव्यांग बेटे के साथ गांव में रहते थे। बीते दिनों अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। ग्रामीणों के अनुसार, गांव के कई पुरुष और युवा रोजगार के सिलसिले में बाहर रहते हैं। ऐसे में रात के समय बलवंत सिंह को अस्पताल ले जाने के लिए तत्काल साधन उपलब्ध नहीं हो सका। अगले दिन गांव की महिलाओं ने खुद जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने बलवंत सिंह को डोली में बैठाया और करीब चार किलोमीटर के ऊबड़-खाबड़ रास्ते से होते हुए कोठा बैंड तक पहुंचाया। इस दौरान 12 से अधिक महिलाओं के मदद करने की जानकारी सामने आई है।
चौखुटिया के बाद अल्मोड़ा रेफर
सड़क तक पहुंचने के बाद बलवंत सिंह को नजदीकी अस्पताल चौखुटिया ले जाया गया। चिकित्सकों ने जांच के बाद उनकी हालत को गंभीर बताते हुए हृदय संबंधी समस्या की जानकारी दी और उन्हें बेस अस्पताल अल्मोड़ा रेफर किया गया। परिजनों के अनुसार, उपचार में देरी के बीच बलवंत सिंह की मौत हो गई। इस घटना ने एक बार फिर सड़क से दूर बसे पहाड़ी गांवों में गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने की चुनौती को सामने ला दिया है।
महिलाओं ने कहा- कष्ट उठाना हमारी नियति बन गई
बलवंत सिंह को डोली में सड़क तक पहुंचाने वाली ग्रामीण महिलाओं ने सड़क सुविधा की समस्या पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि गांव के लोगों को आज भी इलाज और दूसरी जरूरी सुविधाओं के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की सुविधा होती तो गंभीर मरीज को वाहन से सीधे अस्पताल ले जाना संभव होता और इलाज में होने वाली देरी को कम किया जा सकता था। गांव के बुजुर्गों ने भी कहा कि उम्र बीत गई, लेकिन सड़क सुविधा की समस्या आज भी बनी हुई है।
एक साल में तीन मौत का दावा
बलवंत सिंह के छोटे भाई कैप्टन विक्रम सिंह नेगी के अनुसार, पिछले एक साल में समय पर उपचार नहीं मिल पाने के कारण क्षेत्र में तीन लोगों की मौत हो चुकी है। उनका कहना है कि गांव को सड़क से जोड़ने की मांग करीब 25 वर्षों से की जा रही है। क्षेत्र के स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क नहीं होने के कारण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है।
करीब 400 लोगों को सड़क का इंतजार
कुनीगाड़ क्षेत्र के गोगनाणी, दमदड़ और तिमिलपानी गांव चमोली जिले के सीमांत क्षेत्र में स्थित हैं। ग्रामीणों के अनुसार, गोगनाणी में करीब 30, दमदड़ में 10 और तिमिलपानी में लगभग 20 परिवार रहते हैं। तीनों गांवों की कुल आबादी करीब 400 बताई गई है। इन गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने के लिए अलग-अलग प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। इनमें कोठा से दमदड़ तक करीब चार किलोमीटर सड़क लोक निर्माण विभाग के प्रस्ताव में है, जबकि निगलाणी से ऊपरी गांवों को जोड़ने वाली करीब तीन किलोमीटर सड़क पीएमजीएसवाई के तहत प्रस्तावित बताई गई है।
वन विभाग की आपत्तियों में उलझा सड़क प्रस्ताव
सड़क निर्माण के प्रस्ताव को लेकर 25 अगस्त को केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग गोपेश्वर के अधिकारियों और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने संयुक्त निरीक्षण किया था। इसके बाद ग्रामीणों को सड़क निर्माण की उम्मीद जगी थी। हालांकि, वन विभाग की ओर से भेजे गए जवाब में प्रस्तावित सड़क की जद में आने वाले पेड़ों, आरक्षित वन भूमि और मलबा निस्तारण के लिए चिन्हित स्थानों से संबंधित कुछ बिंदुओं पर आपत्ति जताई गई। अधिकारियों के हस्ताक्षर से जुड़ी आपत्ति भी सामने आई है। इसके चलते वर्षों पुरानी सड़क की मांग पर अभी भी विभागीय प्रक्रिया जारी है।
PWD ने कहा- जल्द दूर होंगी आपत्तियां
लोक निर्माण विभाग खंड गैरसैंण के अधिशासी अभियंता आशुतोष कुमार ने बताया कि वन विभाग के साथ संयुक्त सर्वे के बाद कुछ बिंदुओं पर आपत्तियां सामने आई हैं। विभाग ने उनके समाधान के लिए आवश्यक उपकरणों की खरीद कर ली है और जल्द आपत्तियों का निस्तारण कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, केदारनाथ वन प्रभाग के उप वन संरक्षक रजत सुमन के अनुसार, सड़क प्रस्ताव को लेकर कुछ बिंदुओं पर आपत्ति है, जिनमें सुधार के लिए लोक निर्माण विभाग को पत्र भेजा गया है। इसके बाद करीब एक माह के भीतर दोबारा संयुक्त निरीक्षण किया जाएगा।
गैरसैंण क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी उठते रहे सवाल
गैरसैंण क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी स्थानीय स्तर पर मांगें उठती रही हैं। हाल में स्थानीय लोगों ने सीएचसी गैरसैंण में अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था, उपजिला चिकित्सालय का निर्माण पूरा करने और विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती जैसी मांगों को लेकर प्रदर्शन भी किया था। ऐसे में गोगनाणी की घटना सड़क और स्वास्थ्य सुविधा के बीच मौजूद उस चुनौती को सामने लाती है, जिसमें अस्पताल होने के बावजूद मरीज को पहले अस्पताल तक पहुंचने के लिए ही कई किलोमीटर पैदल सफर करना पड़ता है।
क्षेत्र से जुड़े प्रमुख जनप्रतिनिधि और विभाग
गैरसैंण क्षेत्र कर्णप्रयाग विधानसभा क्षेत्र में आता है और यहां से भाजपा के अनिल नौटियाल विधायक हैं। उत्तराखंड सरकार की मौजूदा सूची में अनिल नौटियाल कर्णप्रयाग से विधायक दर्ज हैं। राज्य सरकार में सतपाल महाराज के पास लोक निर्माण विभाग है, जबकि सुबोध उनियाल चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग संभाल रहे हैं। फिलहाल ग्रामीणों की मुख्य मांग सड़क निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाकर गांवों को स्थायी सड़क संपर्क से जोड़ने की है, ताकि भविष्य में किसी गंभीर मरीज को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए फिर डोली का सहारा न लेना पड़े।