उत्तराखंड में बिजली संकट गहराया! 350 MW की कमी,10 रुपये यूनिट तक पहुंची कीमत

उत्तराखंड में पीक आवर्स के दौरान करीब 350 मेगावाट बिजली की कमी से कई क्षेत्रों में कटौती की स्थिति बन रही है। पावर एक्सचेंज में करीब 10 रुपये प्रति यूनिट तक कीमत देने के बावजूद पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है।
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Uttarakhand Power Crisis: Uttarakhand Faces 350 MW Power Shortage During Peak Hours
Image: Uttarakhand Faces 350 MW Power Shortage During Peak Hours

देहरादून: उत्तराखंड में बिजली संकट के बीच पीक आवर्स में बिजली की उपलब्धता सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। राज्य को शाम के व्यस्त समय में करीब 350 मेगावाट बिजली की कमी का सामना करना पड़ रहा है। इसके चलते कई क्षेत्रों में बिजली कटौती करनी पड़ रही है। स्थिति यह है कि पावर एक्सचेंज से महंगी बिजली खरीदने की कोशिश के बावजूद पीक समय में मांग के अनुरूप पर्याप्त बिजली उपलब्ध नहीं हो पा रही है।

Uttarakhand Faces 350 MW Power Shortage During Peak Hours

यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक पीसी ध्यानी के मुताबिक पीक आवर्स में बिजली की कमी की एक बड़ी वजह जलविद्युत उत्पादन में गिरावट है। सितंबर में यूजेवीएनएल से पिछले साल की समान अवधि की तुलना में औसतन करीब 170 मेगावाट कम बिजली मिल रही है। नदियों में जल प्रवाह घटने का असर बिजली उत्पादन पर पड़ा है। पीक आवर्स में जलविद्युत उत्पादन करीब 1094 मेगावाट से घटकर 912 मेगावाट रह गया है।

केंद्रीय जलविद्युत स्टेशनों से भी कम आपूर्ति

राज्य को केंद्रीय जलविद्युत स्टेशनों से भी करीब 90 मेगावाट कम बिजली मिल रही है। इसके अलावा टिहरी पंप स्टोरेज प्लांट की दो इकाइयां तकनीकी कारणों से बंद हैं। इन इकाइयों के बंद रहने से पीक आवर्स में करीब 100 मेगावाट बिजली की उपलब्धता प्रभावित हो रही है। इन सभी कारणों से राज्य की बिजली व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है।

10 रुपये यूनिट तक कीमत, फिर भी बिजली की कमी

बिजली की कमी को पूरा करने के लिए यूपीसीएल पावर एक्सचेंज से अतिरिक्त बिजली खरीदने का प्रयास कर रहा है। लेकिन देशभर में बिजली की उपलब्धता प्रभावित होने के कारण एक्सचेंज से भी पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है। यूपीसीएल के अनुसार पीक आवर्स में एक्सचेंज से राज्य की कुल जरूरत की केवल करीब 1 से 2 प्रतिशत अतिरिक्त बिजली ही मिल पा रही है। ऐसे में बिजली की कीमत करीब 10 रुपये प्रति यूनिट तक पहुंचने के बावजूद जरूरत के मुताबिक बिजली खरीद पाना चुनौती बना हुआ है।

कोयला आपूर्ति प्रभावित होने का भी असर

बारिश के कारण कोयले की आपूर्ति प्रभावित होने से देशभर के कोयला आधारित बिजली संयंत्रों पर भी दबाव है। इसका असर बिजली की उपलब्धता पर पड़ रहा है। यही वजह है कि उत्तराखंड के लिए पावर एक्सचेंज से अतिरिक्त बिजली खरीदकर कमी पूरी करने का विकल्प भी सीमित हो गया है।

ग्रिड फ्रीक्वेंसी गिरने से ओवरड्रॉल पर रोक

शाम के समय बिजली की मांग बढ़ने के साथ ग्रिड फ्रीक्वेंसी करीब 49.50 हर्ट्ज तक गिर रही है। इसके चलते एनआरएलडीसी ने निर्धारित सीमा से अधिक बिजली लेने यानी ओवरड्रॉल पर भी अंकुश लगाया है। इसका मतलब यह है कि यूपीसीएल बिजली खरीदने के लिए तैयार है, लेकिन पीक समय में बाजार में पर्याप्त बिजली उपलब्ध नहीं होने के कारण मांग पूरी करना मुश्किल हो रहा है।

केंद्र से मांगी गई 100 से 400 MW तक मदद

यूपीसीएल के एमडी पीसी ध्यानी के अनुसार राज्य की बिजली जरूरत को देखते हुए केंद्र से भी मदद मांगी गई है। अलग-अलग महीनों के लिए 100 मेगावाट से 400 मेगावाट तक अतिरिक्त बिजली उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। फिलहाल हाइड्रो उत्पादन में कमी, पावर एक्सचेंज में सीमित उपलब्धता और कुछ उत्पादन इकाइयों के बंद होने के कारण उत्तराखंड में पीक आवर्स के दौरान बिजली संकट बना हुआ है।