देहरादून Zoo में फिर खतरनाक कीड़े का हमला! 250 पेड़ों की कटाई के बाद सामने आया नया संकट

उत्तराखंड के जंगलों में साल के पेड़ों के लिए चुनौती बन चुका होपलो बोरर अब देहरादून चिड़ियाघर के पेड़ों में भी दोबारा दिखाई देने लगा है। इससे पहले इसके प्रकोप के चलते जू में करीब 250 पेड़ों को काटना पड़ा था
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Dehradun Zoo Hoplo Borer: Dehradun ZOO Hoplo Borer 250 Trees Cut Again Infection
Image: Dehradun ZOO Hoplo Borer 250 Trees Cut Again Infection

देहरादून: उत्तराखंड के वन क्षेत्रों में साल के पेड़ों को नुकसान पहुंचाने वाला होपलो बोरर अब देहरादून चिड़ियाघर के लिए भी चुनौती बनता दिखाई दे रहा है। चिड़ियाघर में कई पेड़ों में एक बार फिर इस कीड़े के संक्रमण के लक्षण सामने आने के बाद वन विभाग और जू प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। इससे पहले भी होपलो के प्रकोप के कारण देहरादून जू में करीब 250 पेड़ों को काटना पड़ा था। प्रभावित पेड़ों को हटाने के बाद अब दोबारा दूसरे पेड़ों में इसके लक्षण दिखाई देने लगे हैं।

Dehradun ZOO Hoplo Borer 250 Trees Cut Again Infection

होपलो बोरर पेड़ के तने और उसके अंदरूनी हिस्से को नुकसान पहुंचाने वाला कीड़ा है। संक्रमण बढ़ने पर पेड़ कमजोर होने लगते हैं और धीरे-धीरे सूखने की स्थिति में पहुंच सकते हैं। चिड़ियाघर में पुराने और घने पेड़ों की संख्या काफी अधिक है। ये पेड़ जू के प्राकृतिक और हरित वातावरण को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में पेड़ों में होपलो की मौजूदगी सामने आने से विभाग के सामने उन्हें बचाने की चुनौती भी बढ़ गई है।

पहले हटाए गए पेड़ों के बाद फिर कैसे पहुंचा कीड़ा?

होपलो का प्रकोप सामने आने के बाद पहले प्रभावित पेड़ों को हटाया गया था। इसके बावजूद अब कई दूसरे पेड़ों में संक्रमण के लक्षण दिखाई देने लगे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि प्रभावित पेड़ों को हटाए जाने के बाद होपलो दोबारा जू परिसर के अन्य पेड़ों तक कैसे पहुंचा और इसका संक्रमण आगे कितने क्षेत्र तक फैल सकता है। आगे पढ़िए..

रायपुर समेत कई वन क्षेत्रों में भी प्रकोप

होपलो का असर केवल देहरादून चिड़ियाघर तक सीमित नहीं है। देहरादून जिले में रायपुर समेत कई वन क्षेत्रों में भी इसके प्रकोप की स्थिति सामने आ चुकी है। वन विभाग प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी कर रहा है। संक्रमण की स्थिति के आधार पर पेड़ों को अलग-अलग श्रेणियों में रखा जा रहा है। जिन पेड़ों को तत्काल हटाना जरूरी माना जाता है, उन्हें काटा जाता है, जबकि अन्य पेड़ों को बचाने के प्रयास किए जाते हैं।

जू के हरित वातावरण और सुरक्षा पर भी चिंता

चिड़ियाघर में पेड़ों का स्वास्थ्य केवल हरित वातावरण से जुड़ा मुद्दा नहीं है। पुराने या कमजोर पेड़ों के सूखने और गिरने की स्थिति में जू परिसर में सुरक्षा संबंधी जोखिम भी पैदा हो सकता है। ऐसे में वन विभाग के सामने प्रभावित पेड़ों की पहचान के साथ-साथ आसपास के स्वस्थ पेड़ों को संक्रमण से बचाने की चुनौती भी है। लगातार निगरानी और समय रहते कार्रवाई को इस समस्या से निपटने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

स्थायी समाधान को लेकर उठे सवाल

देहरादून के वन क्षेत्रों में पहले से चुनौती बने होपलो बोरर का दोबारा देहरादून जू के पेड़ों में दिखाई देना चिंता का विषय है। करीब 250 पेड़ों को हटाए जाने के बाद फिर सामने आए संक्रमण ने इसके स्थायी समाधान को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब वन विभाग और जू प्रशासन की निगरानी इस बात पर रहेगी कि प्रभावित पेड़ों की संख्या कितनी बढ़ती है और संक्रमण को दूसरे पेड़ों तक फैलने से रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।