उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में बारिश के बीच बर्फबारी शुरू हो गई है। यमुनोत्री और हेमकुंड साहिब में बर्फबारी से ठंड बढ़ गई है, वहीं भारी बारिश के रेड अलर्ट के बीच उत्तरकाशी प्रशासन ने गंगोत्री-यमुनोत्री यात्रा को होल्डिंग प्वाइंट पर अस्थायी रूप से
-
राज्य समीक्षा डेस्क
-
Advertisement
Cheapest Chardham Yatra 2026 Package? The Price Will Shock You!
Planning Chardham in 2026? These 5 Packages Are Getting Booked Fast
Example Ads Media
Image: Snowfall in Yamunotri and Hemkund Sahib
चमोली: उत्तराखंड में सितंबर के आखिरी दिनों में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। यमुनोत्री धाम सहित यमुना घाटी में शनिवार सुबह से बारिश का दौर जारी रहा। वहीं धाम के आसपास के ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बर्फबारी भी हुई।
Snowfall in Yamunotri and Hemkund Sahib
यमुनोत्री धाम के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में टॉप, सप्त ऋषि कुंड, बंदरपूंछ और गरुड़ गंगा क्षेत्र में हिमपात की सूचना है। बारिश और बर्फबारी के बाद यमुनोत्री धाम में ठंड बढ़ गई है। इसके बावजूद श्रद्धालुओं का धाम पहुंचना जारी है। यमुना मंदिर के पुजारी गिरीश उनियाल ने बताया कि मौसम में बदलाव के बाद धाम में ठंड का असर बढ़ गया है।
हेमकुंड साहिब में आधा फीट से ज्यादा बर्फ
उधर, चमोली जिले के ऊंचाई वाले क्षेत्र हेमकुंड साहिब में भी बर्फबारी हुई है। यहां आधा फीट से अधिक बर्फ जमने की जानकारी सामने आई है। बर्फबारी और खराब मौसम को देखते हुए श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही के लिए पुलिस और एसडीआरएफ के जवान मौके पर पहुंचे हैं। जवान यात्रियों को सुरक्षित आवाजाही में मदद कर रहे हैं और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखी जा रही है। IMD ने भी 4,000 मीटर और उससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में 25 से 28 सितंबर के दौरान बर्फबारी की संभावना जताई है।
-
रेड अलर्ट के बीच उत्तरकाशी प्रशासन अलर्ट
Image: Snowfall in Yamunotri and Hemkund Sahib
मौसम विभाग के भारी बारिश के रेड अलर्ट को देखते हुए उत्तरकाशी जिला प्रशासन ने भी सतर्कता बढ़ा दी है। जिलाधिकारी के निर्देश पर हीना और डोबाटा होल्डिंग प्वाइंट पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम की यात्रा को मौसम की स्थिति के अनुसार अस्थायी रूप से रोकने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, बदरीनाथ-केदारनाथ यात्रा फिलहाल सुचारू बताई गई है। हालांकि मौसम खराब होने की स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए स्थानीय स्तर पर निर्णय लिया जा सकता है।
-
26 और 27 सितंबर को भारी बारिश की चेतावनी
Image: Warning of heavy rain on September 26 and 27
IMD के ताजा बुलेटिन के अनुसार 26 और 27 सितंबर को उत्तराखंड में अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी है। 28 सितंबर को भी भारी बारिश और गरज-चमक की संभावना है। 26 सितंबर को बागेश्वर, नैनीताल, पिथौरागढ़, चंपावत और ऊधमसिंह नगर के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है। वहीं देहरादून, पौड़ी, चमोली, रुद्रप्रयाग और अल्मोड़ा में ऑरेंज अलर्ट है। मौसम विभाग ने पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश के दौरान भूस्खलन, मलबा आने और सड़क मार्ग प्रभावित होने की आशंका भी जताई है।
-
कंट्रोल रूम से लगातार निगरानी
Image: Snowfall in Yamunotri and Hemkund Sahib
उत्तरकाशी में जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र और स्मार्ट कंट्रोल रूम को अलर्ट मोड पर रखा गया है। जिले की सभी तहसीलों से बारिश, भूस्खलन और अन्य घटनाओं से जुड़ी सूचनाएं लगातार जुटाई जा रही हैं। गंगोत्री और यमुनोत्री धाम की स्थिति पर लाइव सीसीटीवी के जरिए भी नजर रखी जा रही है। प्रशासन ने मार्ग बाधित होने की स्थिति में उसे जल्द से जल्द खोलने के निर्देश दिए हैं।
-
CM धामी ने 24 घंटे अलर्ट रहने को कहा
Image: Directive to remain on alert round-the-clock
रेड अलर्ट के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन से बातचीत कर संबंधित जिलों और विभागों को जरूरी एहतियाती कदम उठाने को कहा। मुख्यमंत्री ने संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी, राहत और बचाव की तैयारियां पहले से सुनिश्चित करने तथा जिला आपातकालीन संचालन केंद्रों को सक्रिय रखने के निर्देश दिए हैं। मौसम संबंधी चेतावनियों को तत्काल स्थानीय स्तर तक पहुंचाने पर भी जोर दिया गया है।
-
संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों पर प्रशासन की नजर
Image: Administration keeping a close watch on sensitive hilly areas
बारिश के साथ ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी ने उत्तराखंड के मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया है। यमुनोत्री और हेमकुंड साहिब के आसपास बर्फ से ढकी चोटियों ने जहां प्राकृतिक नजारा बदल दिया है, वहीं तापमान में गिरावट से ठंड भी बढ़ गई है। फिलहाल अगले दो दिनों के मौसम को देखते हुए प्रशासन की नजर चारधाम मार्गों और संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों पर बनी हुई है।