एनडी तिवारी की जिंदगी के 5 ऐसे रोचक किस्सों के बारे में हम आपको बता रहे हैं, जो उनकी जिंदगी के संघर्ष की दास्तान को बयां करते हैं।
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कपिल
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Image: life dtory of nd tiwari
: उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश के सीएम, देश के वित्त मंत्री रह चुके एनडी तिवारी अब इस दुनिया में नहीं हैं। विवादों को एक तरफ रखकर अगर उनकी निज़ी जिंदगी के कुछ और पहलुओं पर नज़र डालें, तो एक ऐसा व्यक्तित्व नज़र आता है, जो हमेशा संघर्ष में ही पला और बढ़ा हुआ।
एनडी तिवारी का जन्म 18 अक्टूबर 1925 को नैनीताल के बल्यूटी गांव में हुआ था। वो बेहद गरीब परिवार से थे और इसी गरीबी की मार की वजह से वो इंटर में प्रवेश नहीं ले पाए थे। घर की स्थिति ठीक नहीं थी तो पिता उन्हें आगे पढ़ाने के इच्छुक नहीं थे। साल 1944 के जुलाई महीने में वो 50 रुपये लेकर घर से भाग गए और इलाहाबाद चले गए। वहां उन्होंने तुलसी महाराज के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाया और अपनी पढ़ाई का खर्च जुटाया।
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जब नारायण दत्त तिवारी घर से भागे और उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए इलाहाबाद भागे तो उनके पास सिर्फ एक धोती, फटा हुआ कंबल और जेब में 50 रुपये थे। रहने खाने का कोई इंतजाम नहीं और ना ही इलाहाबाद में किसी परिचय था। जैसे तैसे तक तुलसी महाराज नाम के शख्स से वो मिल और उनक बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने लगे थे। तब जाकर वो आगे की शिक्षा हासिल कर पाए।
कभी भी किसी ने भी नहीं सोचा था कि पाई पाई को मोहताज एक बच्चा अपनी प्रतिबा के दम पर देश का वित्त मंत्री बनेगा और संसद में राष्ट्र का बजट पेश करेगा। उद्योग और वाणिज्य मंत्री बनकर एनडी तिवारी ने देश की उद्योग नीति तय की। अकेले उत्तर प्रदेश में रिकॉर्ड नौ बार उन्होंने राज्य का बजट पेश किया था।
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कुछ वक्त पहले एनडी तिवारी अपने पत्नी उज्जवला और बेटे रोहित के साथ नैनीताल सीआरएसटी गए। ये वो ही जगह थी जहां 1936 में 11 वर्ष की उम्र में उन्होंने दाखिला लिया था। एनडी तिवारी उत्तराखंड के ऐसे इकलौते मुख्यमंत्री रहे, जिन्होंने अब तक मुख्यमंत्री के रूप में पांच साल का कार्याकाल पूरा किया। वो 2002 से 2007 तक उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे। नारायण दत्त तिवारी उत्तराखंड के तीसरे मुख्यमंत्री बने। उन्होंने पूरे 5 साल तक मुख्यमंत्री के पद को संभाला। इसके बाद भुवन चन्द्र खण्डूड़ी, रमेश पोखरियाल निशंक, विजय बहुगुणा, हरीश रावत भी मुख्यमंत्री बने। लेकिन एनडी तिवारी को छोड़कर किसी ने भी मस पद पर 5 साल पूरे नहीं किए। आज एनडी तिवारी हमारे बीच नहीं है, बस उनकी कुछ रोचक यादें हैं, जिन्हें हम याद कर सकते हैं।