उत्तराखंड में स्पेस टेक्नोलॉजी से बड़ा काम, जल संरक्षण और आपदा के दौरान मिलेगी मदद

आपदा से लड़ने और उत्तराखंड में जलनीति तैयार करने के लिए उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र द्वारा एक बड़ा काम किया जा रहा है। आप भी जानिए।
Advertisement Cheapest Chardham Yatra 2026 Package? The Price Will Shock You!

Planning Chardham in 2026? These 5 Packages Are Getting Booked Fast

Example Ads Media
usec: Uttarakhand Space Application Centre initiative in uttarakhand
Image: Uttarakhand Space Application Centre initiative in uttarakhand

चमोली: जल है तो कल है..जल का प्रबल वेग जलजला ला सकता है. तो जल के बिना धरती का कोई अस्तित्व भी नहीं। उत्तराखंड के लिए ये दोनों ही बातें सही साबित होती हैं। कहीं पानी नहीं तो कहीं पानी से हाहाकार मच जाता है। ऐसे में ज़रूरत क्या है ? ज़रूरत उस टेक्नोलॉजी की है, जो ऐसे हालातों में देवभूमि के लिए मददगार साबित हो। इसी कड़ी में उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र यानी (यू-सैक) द्वारा एक बहुत ही बडा़ काम किया जा रहा है। यकीन मानिए अगर सब कुछ सही दिशा में चला तो उत्तराखंड को बहुत बड़ा फायदा मिल सकता है। उत्तराखंड में यू-सैक के द्वारा अलग अलग जल स्रोतों के आंकड़े तैयार किए जा रहे हैं। इसी सिलसिले में यू-सैक द्वारा चमोली जिले के गोपेश्वर के डिग्री कॉलेज में एक दिन की कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस दौरान कुछ ऐसी बातें बताई गईं, जिनके बारे में आपका जानना बेहद जरूरी है।

यह भी पढें - अपने 600 कर्मचारियों को कार गिफ्ट देगा ये कारोबारी, दिवाली पर बंपर बोनस का ऐलान
यू-सैक के निदेशक प्रोफेसर महेंद्र प्रताप सिंह बिष्ट ने बताया कि इस वक्त उत्तराखंड में जल संरक्षण के क्षेत्र में यू-सैक द्वारा कई बड़े काम किए जा रहे हैं। इसके साथ ही कार्यशाला में मौजूद नोडल अधिकारी डॉ. आशा थपलियाल ने बताया कि उत्तराखंड में अलकनंदा, भागरथी समेत सात नदियों, घाटी के हिमनदों, जलस्रोतों और जल धाराओं का गहन रूप से अध्ययन किया जा रहा है। स्पेस टेक्नोलॉजी के माध्यम से इन सभी का डाटा बेस तैयार किया जा रहा है। इसका सीधा फादा उत्तराखंड की जलनीति तैयार करने में मिलेगा। साथ ही एक और बड़ा फायदा ये है कि इससे प्राकृतिक आपदाओं के दौरान होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा। ये बात हर कोई जानता है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से उत्तराखंड की धरती पर बहुत कुछ बदलाव हो रहे हैं।

यह भी पढें - उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत का खुला ऐलान, ‘हर हाल में पहाड़ में ही बनेगा NIT’
यू-सैक के ही वैज्ञानिक शशांक लिंगवाल ने इस दौरान बताया कि सेपेस टेक्नोलॉजी का आज हर शख्स तक पहुंचना जरूरी है। इस कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि विश्व विख्यात पर्यावरणविद और पद्मभूषण से सम्मानित श्री चंडी प्रसाद भट्ट ने जल संकट से सभी को आगाह किया। उन्होंने बताया कि आज प्राकृतिक पेयजल के स्रोत दिन पर दिन कम होते जा रहे हैं और आने वाले दिनों के लिए खतरे की चेतावनी दे रहे हैं। वयोवृद्ध समाजसेवी श्री सुरेन्द्र सिंह लिंगवाल भी इस दौरान मौजूद थे और उन्होंने भी कहा कि तकनीकि के इस्तेमाल से ही आज के समाज का मजबूत और जागरूक बनाया जा सकता है। इसी दौरान साइंटिस्ट डॉ नीलम रावत ने प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन में रिमोट सेंसिंग और GIS टेक्नोलॉजी के बारे में जानकारी दी। कुल मिलाकर कहें तो यू-सैक द्वारा एक बड़ी पहल की जा रही है, जिससे उत्तराखंड को बहुत बड़ा फायदा मिल सकता है।