मीनाक्षी नेगी ने सीबीएसई बोर्ड परीक्षा में 90 फीसद अंक हासिल कर साबित कर दिया की परिस्थिति चाहे कैसी भी हो हमें हार नहीं माननी चाहिए।
-
कोमल
-
Advertisement
जहां आज भी सिर्फ चरवाहे जाते हैं – केदार हिमालय के अनदेखे ट्रेक्स
प्रकृति, शांति और हिमालय – केदार के गुप्त ट्रेक्स.. यहां कदम रखते ही बदल जाती है सांस और सोच – Hidden Kedar Trails
Example Ads Media
Image: story of meenakshi negi of uttarakhand
हरिद्वार: कैंसर एक ऐसी बीमारी है, जो केवल एक इंसान को नहीं बल्कि पूरे परिवार को तोड़कर रख देती है। सीबीएसई बोर्ड में टॉप करने वाली हरिद्वार की मीनाक्षी का परिवार भी इन दिनों इसी दर्द से गुजर रहा है, मीनाक्षी के पिता को कैंसर है...मां भी बीमार रहती है। मीनाक्षी दिन-रात पिता की सेवा में जुटी रहती हैं, लेकिन इस बेटी को पिता के स्वास्थ्य के साथ ही उनके सपनों की भी परवाह है...वो सपने जो एक पिता ने अपनी बेटी के लिए देखे हैं। मीनाक्षी ने खूब मेहनत की और सीबीएसई बोर्ड की 12वीं की परीक्षा में 90 फीसद अंक हासिल कर साबित कर दिया कि अगर मजबूत इच्छाशक्ति हो तो हर चुनौती पर जीत हासिल की जा सकती है। मीनाक्षी नेगी के परिवार के लिए खुशी का ये मौका लंबे इंतजार के बाद आया था, क्योंकि मीनाक्षी के पिता को कैंसर होने के बाद से ये परिवार बेहद परेशान है और तंगहाली से गुजर रहा है। मीनाक्षी के पास होने की ये खुशी उस वक्त दोगुनी हो गई जब डीएम दीपक रावत शुक्रवार को अचानक मीनाक्षी के घर पहुंचे और उन्हें गुलदस्ता भेंट किया।
यह भी पढें - उत्तराखंड : भयानक सड़क हादसे में गई पत्नी की जान, दो महीने पहले ही हुई थी शादी
डीएम दीपक रावत के अचानक घर आ जाने से मीनाक्षी नेगी बेहद खुश थीं, उनका परिवार भी खुशी से फूला नहीं समा रहा था। खुद डीएम दीपक रावत ने पहाड़ की इस बेटी के हौसले को सलाम किया और कहा कि मीनाक्षी ने विपरीत परिस्थितियों में भी साहस बनाए रखा और अपनी मेहनत से अच्छे अंक हासिल किए। मीनाक्षी के परिवार की माली हालत भी ठीक नहीं है। पापा और मां की तबीयत खराब होने के बावजूद मीनाक्षी अच्छे नंबरों से पास हुई। डीएम दीपक रावत ने कहा कि मीनाक्षी का सपना डॉक्टर बनने का है, वो पूरी कोशिश करेंगे कि इस बेटी के सपने पूरे हों, वो जितना संभव हो मीनाक्षी की मदद करेंगे। दूसरे लोगों को भी ऐसे प्रतिभाशाली छात्रों की मदद करनी चाहिए ताकि वो सफलता की नई इबारत लिख सकें। आपको बता दें कि दसवीं की परीक्षा में भी मीनाक्षी ने 95 फीसद अंक हासिल किए थे। मीनाक्षी डॉक्टर बनना चाहती हैं, ताकि वो गरीब लोगों का इलाज कर सके। पहाड़ की ऐसी जीवट और होनहार बेटियों को हमारा सलाम...जो कि कठिन परिस्थिति में भी हौसला बनाए हुए हैं और अपनी मेहनत से उन पर जीत भी हासिल कर रही हैं।