जय देवभूमि: इस दिन खुलेंगे रुद्रनाथ धाम के कपाट, लगेगा नए अनाज का भोग

भगवान रुद्रनाथ के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोलने की तैयारी हो रही है। जानिए तिथि और इस मंदिर का महात्म्य
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उत्तराखंड: rudranath kapat to open soon
Image: rudranath kapat to open soon

चमोली: उत्तराखंड में चारधाम यात्रा शुरू होने के साथ ही चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ के कपाट खोलने की तैयारी भी अंतिम चरण में पहुंच गई है। चमोली जिले में 19 मई को समुद्रतल से 3600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ के कपाट खोले जाएंगे। कपाट खुलने के बाद भक्त मंदिर में भगवान रुद्रनाथ के दर्शन कर सकेंगे। रुद्रनाथ मंदिर में भगवान शिव के मुख के दर्शन होते हैं, यहां पूजा-आराधना करने का विशेष महत्व है। इससे पहले बुधवार को बाबा रुद्रनाथ की उत्सव मूर्ति को गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर के गर्भगृह से बाहर निकालने के बाद इसे मंदिर परिसर में विराजमान किया गया। भक्तों के लिए ये बेहद खास मौका है। आने वाले दो दिन तक भक्त यहीं पर बाबा के दर्शन करेंगे।इसके साथ ही क्षेत्र में उत्सव का दौर भी प्रारंभ हो गया है, 17 मई को बाबा रुद्रनाथ की उत्सव डोली गोपीनाथ मंदिर से सगर गंगोलगांव होते हुए रात्रि विश्राम के लिए पनार पहुंचेगी।

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देव डोली 18 मई को रुद्रनाथ के लिए रवाना होगी और 19 मई को ब्रह्म मुहूर्त में हवन और मंत्रोच्चार के बीत रुद्रनाथ मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। रुद्रप्रयाग जिले में स्थित द्वितीय केदार भगवान मदमहेश्वर के मंदिर के कपाट खोलने की प्रक्रिया भी आज से शुरू हो गई है। पूजा-अर्चना के बाद बाबा मध्यमेश्वर की भोग मूर्ति को ऊखीमठ स्थित पंचगद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर के गर्भगृह से बाहर निकालकर सभामंडप में विराजमान किया गया। 21 मई धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। गढ़वाल क्षेत्र के लिए शिवधामों के कपाट खुलने का अवसर किसी त्योहार से कम नहीं है। मदमहेश्वर मंदिर के कपाट खुलने के बाद डंगवाड़ी और भटवाड़ी गांव के लोग बाबा को नए अनाज का भोग लगाएंगे। देव डोली 21 मई की सुबह मद्महेश्वर पहुंचेगी, जहां कर्क लग्न में दोपहर 11 बजकर 30 मिनट पर मंदिर के कपाट खोले जाएंगे।

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देवभूमि उत्तराखंड में पंच केदार भगवान शिव के पवित्र स्थान हैं। यहां भगवान शंकर के विभिन्न विग्रहों की पूजा होती है। पंच केदारों में केदारनाथ धाम का सर्वोच्च स्थान है, मद्महेश्वर द्वितीय केदार है, यहां भगवान शंकर के मध्य भाग के दर्शन होते है। तृतीय केदार के रूप में प्रसिद्ध तुंगनाथ में भगवान शिव की भुजा के रूप में आराधना होती है। चतुर्थ केदार के रूप में भगवान रुद्रनाथ विख्यात हैं। यह मंदिर समुद्र तल से 2286 मीटर की ऊंचाई पर एक गुफा में स्थित है। पंचम केदार के रूप में कल्पेश्वर मंदिर में पूजा अर्चना होती है। इसे कल्पनाथ नाम से भी जाना जाता है। यहां भगवान की जटा के दर्शन होते हैं। यहां भगवान के दर्शन के लिए 12 महीनों श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।