मौसम विभाग ने पहाड़ी जिलों में बारिश-ओलावृष्टि का अलर्ट जारी किया है, मैदानी इलाकों में अंधड़ से लोगों की परेशानी बढ़ेगी...
-
कोमल नेगी
-
Advertisement
Best Hidden Treks in Kedar Himalaya for True Mountain Lovers
A chance to reconnect with nature and inner peace. Treks in Kedar Himalaya that stay with you for a lifetime.
Example Ads Media
Image: rain and storm alert in uttarakhand
देहरादून: पहाड़ के लोगों को मौसम से सावधान रहने की जरूरत है, आज से उत्तराखंड में मौसम एक बार फिर करवट बदलेगा। इस वक्त ज्यादातर पहाड़ी इलाकों में घने बादल छाए हैं, कई जगह बारिश होने की भी खबर है। मौसम विभाग ने गुरुवार को उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी दी है, जबकि मैदानी इलाकों में धूलभरी आंधी लोगों की मुश्किलें बढ़ाएगी। चमोली, रुद्रप्रयाग, पौड़ी, पिथौरागढ़ समेत ज्यादातर पहाड़ी जिलों में भारी बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार इस दौरान पूरे प्रदेश में बादल छाए रहेंगे। बारिश की वजह से तापमान में गिरावट आएगी, गर्मी से बेहाल लोग राहत महसूस करेंगे, लेकिन पहाड़ी इलाकों में बारिश से मुश्किलें बढ़ सकती हैं। पहाड़ी इलाकों में गरज के साथ तेज बौछार और कहीं-कहीं ओलावृष्टि होने की संभावना है। मैदानी इलाकों में धूल भरी आंधी लोगों की परेशानी बढ़ाएगी। मौसम विभाग ने खासतौर पर हरिद्वार और ऊधमसिंहनगर में आंधी की चेतावनी जारी की है।
यह भी पढें - Video: DM दीपक रावत ने रोकी बस..यात्रियों के पास नहीं थे टिकट, पुलिस के हवाले कंडक्टर
मौसम विभाग के बुलेटिन के अनुसार गुरुवार को मैदानी इलाकों में हवा की रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा के आसपास रह सकती है। पिंडर घाटी में भी वन विभाग अब राहत के लिए आसमान के भरोसे है। थराली और देवाल ब्लॉक के जंगलों में पिछले एक हफ्ते से आग लगी हुई है। लाखों की वन संपदा जलकर राख हो गई है, आग से सौ हेक्टेयर से ज्यादा भूमि भी नष्ट हो गई। वन विभाग कोशिश तो कर रहा है, लेकिन आग पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका है। देवाल के कलपट्टा, तलौर, जैनविष्ट समेत कई गांवों के जंगल आग से धधक रहे हैं। ग्रामीण भी वन विभाग की मदद कर रहे हैं, पर पिरूल की वजह से आग फैल रही है। इस इलाके में लंबे वक्त से बारिश नहीं हुई है। लोग और वन विभाग अब आसमान की तरफ नजरें गढ़ाए हुए हैं...बारिश का इंतजार कर रहे हैं ताकि जंगलों में लगी आग पर काबू पाया जा सके।