Uttarakhand: उत्तराखंड की सुंदरधुंगा घाटी में दिखा वो दुर्लभ जीव, जिसे ढूंढ रहे हैं दुनियाभर के जीव वैज्ञानिक

उत्तराखंड की सुंदरधुंगा घाटी में वन विभाग के ट्रैप कैमरों में दुर्लभ सैटायर ट्रैगोपैन तीतर की मौजूदगी दर्ज की गई है। यह प्रजाति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘निकट संकटग्रस्त’ श्रेणी में है। इस खोज ने क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता को एक बार फिर उजागर किया है

क्या है सैटायर ट्रैगोपैन?

सैटायर ट्रैगोपैन एक खूबसूरत और शर्मीला तीतर है, जो मुख्य रूप से पूर्वी और मध्य हिमालय में 2400 से 4200 मीटर की ऊंचाई पर पाया जाता है। इस पक्षी की घने, नम और समशीतोष्ण वन में छिपकर रहने की आदत होती है, जिस कारण इसको देखना दुर्लभ होता है। पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार, इसे देख पाना बेहद कठिन होता है, यही वजह है कि इसका कैमरे में कैद होना बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

कोकलास तीतर भी कैमरे में कैद

अभियान में कोकलास तीतर की तस्वीर भी कैमरे में कैद हुई है। यह पक्षी चौड़ी पत्ती वाले मिश्रित वन में 1800 से 3300 मीटर की ऊंचाई पर पाया जाता है। कोकलास तीतर की संख्या में धीरे-धीरे कम होती जा रही है, हालांकि यह अभी संकटग्रस्त श्रेणी में नहीं है, लेकिन इसकी घटती संख्या चिंता का विषय है। अपनी शानदार कलगी, पंखों के बारीक पैटर्न और गर्दन पर मौजूद सफ़ेद धब्बे के लिए मशहूर, हिमालय का यह तीतर पहाड़ी जंगल की ज़मीन के साथ पूरी तरह से घुल-मिल जाता है। अक्सर दिखाई देने से पहले ही इसकी आवाज़ सुनाई दे जाती है; कोकलास तीतर पश्चिमी हिमालय के सबसे ज़्यादा छिपे रहने वाले पक्षियों में से एक है, जिसकी वजह से वन्यजीव फ़ोटोग्राफ़रों के लिए इस तरह के नज़ारे सचमुच बेहद खास बन जाते हैं।

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