प्रभा सेमवाल prabha devi semwal ने साबित करदिया है कि प्रयास करते रहने से सफलता एक दिन ज़रूर मिलती है। उनकी मेहनत की वजह से आज ज़मीन फिर से हरी-भरी है।
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अनुष्का ढौंडियाल
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Image: Inspiring story of prabha devi semwal of rudraprayag
रुद्रप्रयाग: कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती...76 साल की प्रभा सेमवाल prabha devi semwal ने एक जीवंत उदाहरण समाज के समक्ष पेश किया है। एक ऐसी औरत जिसने 30 साल तक एक बंजर पड़ी भूमि को नया जीवन प्रदान किया। एक माँ जैसे अपने बच्चे को पोषित करती हैं, उन्होंने भी ठीक उसी तरह से उस बंजर ज़मीन को पोषित किया। यह बात लगभग तीस साल पहले की है। अवैध कटान और भूस्खलन से रुद्रप्रयाग(उत्तराखंड) के ऊखीमठ ब्लॉक स्थित फली फ़सालत गांव से लगे जंगल का एक बड़ा हिस्सा तबाह हो गया था। इससे फली फ़सालत गांव समेत आसपास के कई गांवों में जलाने के लिए लकड़ी और मवेशियों के लिए चारे का संकट खड़ा हो गया। ऐसे में प्रभा देवी सेमवाल ने अपने हाथों में कमान सम्भाली और अपने बंजर पड़े खेतों के किनारे विभिन्न प्रजाति के चारा-पत्ती वाले पौधे रोपना शुरू किया। वे तीस वर्ष जैसे लंबे समय तक बुरांश, काफल, रीठा, दाल चीनी, गुरियाल, हैड़ा आदि प्रजातियों के पौधों का रोपण करती रहीं। घर परिवार को देखते के साथ ही उन्होंने पर्यावरण को भी उतनी ही तव्वजों दी। उनकी तीस साल की कड़ी मेहनत का नतीजा है कि लोगों की जंगल से जुड़ी ज़रूरतें भी पूरी हो रही हैं।
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साथ ही साथ प्रभा prabha devi semwal ने घर के आसपास खूबसूरत सा बागीचा भी खड़ा किया है, जहां उन्होंने अनार, अमरूद, आंवला, संतरा आदि के 40 से अधिक पेड़ लगा रखे हैं जो की सालभर फल देते हैं।उन्हीं से प्रेरित होकर गांव की अन्य महिलाएं भी पर्यावरण में अपना सहयोग प्रदान कर रही हैं। प्रभा बताती हैं कि पर्यावरण को लेकर जो उन्होंने मेहनत करी उसमें उनके पति शिव प्रसाद सेमवाल का भी हाथ रहा। उन्होंने प्रभा को पूरा सहयोग दिया। उन्होंने बताया कि प्रभा ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर जीवन समर्पित करदिया है उसपर उनको गर्व है। प्रभा के इस कार्य को कई जाने-माने लोगों ने भी सराहा है। 2019 तक रुद्रप्रयाग वन प्रभाग में प्रभागीय वनाधिकारी रहे राजीव धीमान ने प्रभा द्वारा किये गए समर्पण को खूब जम कर सराहा। साथ ही साथ क्षेत्र पंचायत सदस्य विष्णुकांत शुक्ला कहते हैं कि प्रभा से प्रभावित होकर आसपास के गांव की महिलाएं भी अपने घरों में पौधे लगा रही हैं। प्रसिद्ध पर्यावरणविद जगत सिंह कहते हैं कि पर्यावरण को लेकर गम्भीरता बहुत ज़रूरी है। यह बेहद खुशी की बात है कि नई पीढ़ी इस बात को समझ रही है और इसमें अपना सहयोग भी दे रही है।