40 परिवारों के इस गांव में सड़क नहीं थी। लॉकडाउन के दौरान जब लोगों को फुर्सत मिली तो उन्होंने अपने गांव के लिए कुछ करने की ठानी। इस तरह एक महीने में उम्मीदों की सड़क बनकर तैयार हो गई....
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कोमल नेगी
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ये ट्रेक्स गूगल मैप पर भी नहीं मिलेंगे! केदार हिमालय के छुपे हुए रास्ते
प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
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Image: village people build road during lockdown in nainital
नैनीताल: लॉकडाउन में आप घर पर क्या कर रहे हैं? इस सवाल का ज्यादातर जवाब होगा ‘बोर हो रहे हैं’। कुछ टीवी देख रहे होंगे, कुछ सोशल मीडिया पर बिजी होंगे, लेकिन नैनीताल के एक गांव के ग्रामीणों ने लॉकडाउन के समय का ऐसा शानदार इस्तेमाल किया कि आप भी वाह-वाह कर उठेंगे। इस गांव के लोगों ने लॉकडाउन के दौरान पहाड़ जैसी कठिन चुनौतियों पर जीत हासिल कर अपने गांव के लिए सड़क बना दी। अब गांव के पास अपनी सड़क है। इस गांव का नाम है खड़की। 40 परिवार रहते हैं यहां। एनबीटी (नवभारत टाइम्स) की खबर के मुताबिक गांव में एक दशक पहले 6 लाख की लागत से शिलौटी इलाके में 3 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई गई थी। कुछ दिन तक सड़क टिकी भी रही, लेकिन बाद में उखड़ने लगी। कुछ दिन बाद सड़क का नामों निशां तक मिट गया। जिस जगह सड़क थी, वहां भूस्खलन का मलबा जमा होने लगा। हर तरफ झाड़ियां उग आईं। गांव से शहर तक जाने का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया। गांववाले अधिकारियों से शिकायत करते रहे, लेकिन कोई गांव में झांकने तक नहीं आया।
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इसी बीच लॉकडाउन लगा तो लोगों ने सोचा कि क्यों ना इस समय का इस्तेमाल सड़क को ठीक करने के लिए किया जाए। जहां चाह, वहां राह। देखते ही देखते गांव के 25 लोग सड़क बनाने के लिए आगे आए। जिन्हें छोटी-छोटी टीमों में बांटा गया। लोगों के पास उपकरणों की कमी थी, जंगली जानवरों के हमले का डर भी था, पर लोगों ने हर चुनौती को पार कर आखिर अपने गांव के लिए उम्मीदों की सड़क बना ही दी। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ख्याल रखा गया। ग्रामीणों की मेहनत से एक महीने में रोड बनकर तैयार हो गई। कल तक जिस सड़क पर पैदल चलना मुश्किल हुआ करता था, वहां अब बाइक चलाई जा सकती है। नैनीताल के डीएम सविन बंसल ने भी ग्रामीणों के प्रयास को सराहा। उन्होंने कहा कि कोरोना संकट खत्म होने के बाद गांववालों के मदद की जाएगी और सड़क को पक्का किया जाएगा।