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जहां आज भी सिर्फ चरवाहे जाते हैं – केदार हिमालय के अनदेखे ट्रेक्स
प्रकृति, शांति और हिमालय – केदार के गुप्त ट्रेक्स.. यहां कदम रखते ही बदल जाती है सांस और सोच – Hidden Kedar Trails
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नैनीताल: उत्तराखंड में कोरोना के आंकड़ों ने शतक पूरा कर लिया है। ऐसे में राज्य की रक्षा के लिए एक ओर सरकार, प्रशासन और तमाम कोरोना वारियर्स हैं जो इस वायरस के खिलाफ मैदान में उतर कर दिन-रात संग्राम कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ऐसी पिछड़ी मानसिकता वाले कुछ ऐसे लोग हैं जो ऐसी वैश्विक महामारी के बीच भी जातिवादी और पिछड़ी सोच का प्रदर्शन कर रहे हैं। उत्तराखंड के ओखलकांडा में भी कुछ ऐसी ही शर्मनाक घटना का खुलासा हुआ है। ओखलकांडा क्षेत्र में क्वारंटाइन किए गए 2 सवर्णों ने क्वारंटाइन केंद्र में अनुसूचित जाति वाली माता द्वारा बनाए गए भोजन को ग्रहण करने से साफ तौर पर इंकार कर दिया है। उन 2 युवकों ने तो अनुसूचित जाति कि भोजन बनाने वाली माता के हाथ का छुआ पानी तक पीने को मना किया है। उनका ऐसा मानना है कि अनुसूचित जाति के व्यक्तियों के हाथों का बना खाना खा कर वह दूषित हो जाएंगे। बकायदा दोनों युवक क्वारंटाइन के नियमों का उल्लंघन करके घर से खाना-पीना मंगा रहे हैं। अन्नपूर्णा के रूप में सभी युवकों के लिए खाना बनाने वाली उस औरत के ऊपर क्या बीत रही होगी उसका हम जरा भी अंदाजा नहीं लगा सकते।