पहाड़ में युवा प्रधान भी हैं, प्रवासी भाईयों को साथ जोड़ा..स्वरोजगार की शानदार कोशिश

उत्तराखंड के जिला रुद्रप्रयाग के ग्राम मयकोटी के प्रधान होने के नाते अमित प्रदाली ने एक शानदार कोशिश की है।
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Rudraprayag News: Rudraprayag Mayakoti Pradhan Pradeep Pradali
Image: Rudraprayag Mayakoti Pradhan Pradeep Pradali

रुद्रप्रयाग: राज्य बने हुये 19 साल हो गये हैं, उत्तराखंड में सैकड़ों गांव जो विरान थे लेकिन आज कोरोना महामारी के चलते उत्तराखंड के गांवों से जो लोग मूलभूत सुविधाओं और रोजगार के अभाव को देखते हुए राज्य से पलायन कर चुके थे, वो आज फिर से पहाड़ में लौट चुके हैं। अब शायद समय आ गया है अगर वाकई में यदि पलायन रोकना है तो हमे भी किसी नए विचार के साथ फिर से अपने गाँवों का रुख करना होगा और एक नयी शुरुआत को जन्म देना होगा। प्रधान प्रदेश ,देश के विकास करने की पहली कड़ी है। प्रधान चाहे तो पलायन जैसी समस्या को खत्म किया जा सकता है। ऐसे ही एक युवा प्रधान हैं अमित प्रदाली। उत्तराखंड के जिला रुद्रप्रयाग के ग्राम मयकोटी के प्रधान होने के नाते अमित प्रदाली ने एक शानदार कोशिश की है। अमित प्रदाली गांव में लौटें प्रवासियों को जैविक खेती के जरिये रोजगार देने की कोशिश कर रहे हैं। उत्तराखंड के सभी प्रधानों, छेत्र पंचायत सदस्य, जिला पंचायत सदस्यों से अमित प्रदाली का अनुरोध है कि, वो भी अपने अपने क्षेत्रों में ऐसी योजनाओं को बनाएं जो धरातल में कारगर हो। आगे पढ़िए

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अमित प्रदाली कहते हैं कि अपने गावँ क्षेत्र को आर्थिक सम्पन्न बनाने के लिये योजनाओं को बनाने की आवश्यकता है। गाँव मे स्थाई रोजगार बढ़ाने के लिए आवश्यकता है। गांव मे रोजगार के लिये पर्यटन, जैविक खेती जैसी योजनाओं को बढ़ावा देना होगा। अमित प्रदाली इस वक्त प्रवासी भाइयों को साथ में जोड़ रहे हैं कह रहे हैं कि उत्तराखंड में अपार संभावनाएं हैं। पशुपालन, पेड़ लगाने ,भगवानी, ईमानदारी से कार्य करने की आवश्यकता है ।अपने गांव की विशेषता के वास्तविक स्वरूप को आगे बढ़ाने मे हमे आगे आने की पहल तो गावँ के प्रथम नागरिक को करनी है। प्रत्येक गांव की अपनी पहचान है उस गावँ के लोगो को उस दिशा में आगे काम करने के लिये प्रशिक्षण के तौर पर गावँ की योजनाओं में जोड़ने का कार्य करना चाहिए। पहाड़ में छोटे छोटे उद्योग को बढ़ाने की आवश्यकता है। युवाओं की रुचि को देखते हुये स्वयं सहायता समूह को के माध्यम से गांव के लोंगो को स्थाई रोजगार देने के लिये उत्तराखंड के प्रत्येक जनप्रतिनिधियों को काम करने की आवश्यकता है। प्रधान अमित प्रदाली की व्यक्तिगत कोशिश है उम्मीद है कि इन पांच सालों में पलायन रोकने में उनकी ये मुहिम धरातल पर कारगर होगी।।