रुद्रप्रयाग के मेन मार्केट में पीपल का पेड़ नहीं कटना चाहिए..आपकी राय क्या है?

चर्चा गरम है...इसलिए हमें आपकी भी चाहिए। हां इस बीच हमारी आपसे अपील है कि अफवाहों से दूर रहें।
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Rudraprayag Peepal Tree: Peepal tree in rudraprayag main market
Image: Peepal tree in rudraprayag main market

रुद्रप्रयाग: सोशल मीडिया, न्यूज पेपर, न्यूज पोर्टल पर गाहे बगाहे एक सरसरी निगाह पड़ी तो रुद्रप्रयाग का जिक्र था। रुद्रप्रयाग की भी उस खबर का ज़िक्र..जिससे शायद कई लोगों की यादें भी जुड़ी हैं। मेन मार्केट में पीपल का पेड़..एकदम घना, छायादार। पीपल के पेड़ के नीचे ही विराजमान थे पवनपुत्र हनुमान। खबर है कि मंदिर को वहां से हटा दिया गया है और खबर ये भी है कि अब पीपल के पेड़ का नंबर है। मंदिर के बारे में सूचना मिली है कि हनुमान जी की मूर्ति को फिर से उसी जगह कुछ वक्त बाद पूजा अर्चना के साथ प्रतिष्ठापित कर दिया जाएगा। चलिए...एक मसला तो ये हुआ। लेकिन अगला मसला बड़ा गंभीर है। सुना है रुद्रप्रयाग मार्केट से पीपल के पेड़ को हटा दिया जाएगा? मंदिर को वापस उसी जगह पर बन जाएगा लेकिन पीपल का पेड़ तो नहीं आएगा न? तो जि़द पर कौन अड़ा है? आगे पढ़िए

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लोगों की मानें तो रुद्रप्रयाग मेन बाजार में जितने भी दुकानदार हैं..उन्होंने भी तो सड़के घेरी हुई हैं। दुकान को आगे बढ़ाकर सड़क तक फैलाया हुआ है। ऐसे में पीपल का क्या दोष? वो क्यों कटेगा भई? अगर तमाम दुकानदारों ने अपनी अपनी दुकानें सड़क तक फैलाई हुई हैं..तो क्या उन्हें एक सेकंड का वक्त गंवाए बिना अतिक्रमण मुक्त मेन मार्केट के बारे में नहीं सोचना चाहिए? कुल मिलाकर समझ लीजिए कि अब रुद्रप्रयाग मेन मार्केट की शान पीपल के पेड़ की जिंदगी का जिम्मा तमाम दुकानदारों के कंधों पर है। पीपल का पेड़ बचाना है, तो एकजुट होना होगा। वरना रुद्रप्रयाग मेन मार्केट में गर्मियों की तपती धूप में आंखें उस छाया को ढूंढेंगी। मेन मार्केट के हनुमान मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को भी एक बात याद होगी...यहां पूजा करने के बाद वो रोली का धागा इसी पीपल के पेड़ से लपेटते थे। मंदिर तो वापस अपनी जगह पर आ जाएगा। लेकिन हजारों दुआओं की रोली खुद पर लपेटे इस पेड़ का ध्वस्त होना दुखद होगा।

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ऊपर से न जाने क्या क्या अफवाहें फैल रही हैं रुद्रप्रयाग जिले में। यहां सबसे बड़ा सवाल तो डीएम रुद्रप्रयाग से बनता है कि वो इन अफवाहों पर विराम लगाने के लिए क्या कदम उठा रही हैं? हो सकता है कि डीएम साहिबा ने इस बारे में कुछ दिशा-निर्देश दिए हों, लेकिन अब तक उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिला है। बाकी और चीजों की जानकारी यानी अपडेटट उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर दिख रही है। इस बीच रुद्रप्रयाग के रहने वाले कुणाल डोभाल ने एक वीडियो शेयर किया है। आप भी देखें।

कृपया अफ़वाहों से दूर रहे !

रुद्रप्रयाग मेंन मार्केट स्थित हनुमान मन्दिर को ज़बरदस्ती नहीं तोड़ा गया, हनुमान जी की मूर्ति को मार्च महीने में ही विधिवत रूप से स्थान्तरित कर लिया गया था!

पौराणिक = जिसका वर्णन पुराणों में हो

प्राचीन = पुरातन

*मन्दिर लगभग 70 साल पुराना था जिसमें सभी रुद्रप्रयाग वासियों की आस्था थी, ग़लत तरीक़े से इस ख़बर को फैलाया जा रहा है जिससे लोगों को भड़काया जा सके।

Posted by Kunal Dobhal on Wednesday, June 24, 2020