कोरोना सैंपल जांच में किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए। दूरस्थ क्षेत्रों में सैंपल भेजने में देरी हो रही हो तो इसके लिए हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किया जा सकता है, आगे पढ़िए पूरी खबर
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Komal Negi
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नैनीताल: नैनीताल में डीएम सविन बंसल और उनकी टीम ने जीआईएस मैपिंग बेस्ड सॉफ्टवेयर तैयार किया है। कोरोना रोकथाम में ये मॉडल बेहद कारगर साबित हो सकता है। फिलहाल उत्तराखँड के 4 सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों देहरादून, अधम सिंह नगर, हरिद्वार और नैनीताल मेंम इस मॉडल को लागू किया जाएगा। इसके बाद बाकी जिलों में भी ये प्रयोग हो सकता है। उत्तराखंड कोरोना से लगातार लड़ रहा है। प्रदेश में कोरोना संक्रमित मरीजों का आंकड़ा बढ़कर 19827 हो गया है। प्रदेश सरकार कोरोना से निपटने के लिए हर जरूरी इंतजाम कर रही है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सचिवालय में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए स्वास्थ्य विभाग और जिलाधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक ली। मुख्यमंत्री ने कोरोना योद्धाओं की सुरक्षा के लिए चिकित्सा सेतु मोबाइल ऐप लांच किया। इसे डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, नर्स, पुलिसकर्मी और कोरोना ड्यूटी में लगे कोरोना योद्धाओं की सुरक्षा के लिए तैयार किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना पर प्रभावी नियंत्रण के लिए टेस्टिंग को और बढ़ाने की जरूरत है।
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सैंपल भेजने में देरी नहीं होनी चाहिए। दूरस्थ इलाकों से सैंपल को टेस्टिंग लैब में भेजने के लिए हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कोरोना के चलते पैदा हुई बेरोजगारी की समस्या पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों से लौटे युवाओं को रोजगार देने के लिए कई योजनाएं शुरू की गई हैं। डीएम इन योजनाओं को जनप्रतिनिधियों के माध्यम से लोगों तक पहुंचाएं। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना को सफल बनाने के लिए जिलाधिकारी बैंकर्स के साथ मिलकर सुनियोजित योजना बनाएं। मुख्यमंत्री ने एक और जरूरी बात कही। उन्होंने जिलाधिकारियों और दूसरे अधिकारियों को निर्देश दिए कि लोगों के फोन कॉल जरूर रिसीव करें। किसी जरूरी काम में व्यस्त होने पर इस बारे में सूचना दें।
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बैठक में मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने कहा कि कोरोना के कम्युनिटी स्प्रेड को रोकना सबसे जरूरी है। देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और ऊधमसिंहनगर जिले में विशेष सतर्कता बरती जाएगी। उन्होंने कहा कि नैनीताल में डीएम ने जो जीआईएस मैपिंग बेस्ड सॉफ्टवेयर तैयार किया है, वो कोरोना रोकथाम में मददगार साबित हो सकता है। एनआईसी द्वारा इस सॉफ्टवेयर को और बेहतर बनाया जाए, ताकि इसे चारों मैदानी जिलों में इस्तेमाल किया जा सके। इसके अलावा प्रदेश सरकार ने निजी अस्पतालों में कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज करने के लिए गाइडलाइन जारी कर दी है। इसके तहत नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड ऑफ हॉस्पिटल एंड हेल्थ केयर (एनएबीएच) से मान्यता प्राप्त निजी अस्पताल ही कोरोना मरीजों का इलाज कर सकेंगे। बैठक में सचिव स्वास्थ्य अमित नेगी, मुख्यमंत्री के आईटी सलाहकार रविन्द्र दत्त समेत दूसरे विभागों के कई अधिकारी मौजूद रहे।