25 महिलाओं ने घर में डेकोरेशन करने वाले झालरों और सजावटी लाइटों को एक अनोखा रूप दिया है और ये झालर चाइनीस झालरों को जमकर टक्कर दे रहे हैं।
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Komal Negi
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Image: Women made waterproof skirting in Nainital
नैनीताल: दिवाली बस आने ही वाली है और मार्केट में इस समय दिवाली को लेकर लोगों के बीच खासा उत्साह नजर आ रहा है। मगर इस बार की दिवाली बीते सालों से कुछ खास और अलग है। पिछले साल तक जहां बाजार चाइनीज सामान से भरे हुए थे, इस साल कई लोग चाइना के प्रोडक्ट को बॉयकॉट करने में जुटे हुए हैं। लोग वापस से स्वदेशी उत्पादों को अपना रहे हैं और वोकल फॉर लोकल की मुहिम में अपना योगदान दे रहे हैं। भारतीय बाजार में अब हर कोई चीनी उत्पादों को जड़ों से उखाड़ कर फेंकने के लिए तैयार है। इस बीच कई स्थानीय लोगों ने चाइनीज प्रोडक्ट्स को जम के टक्कर देनी शुरू की है और उससे बेहतर गुणवत्ता का सामान वे मार्किट में उतार रहे हैं। इस दिवाली उत्तराखंड की कुछ महिलाएं भी हैं जो लोकल फॉर लोकल की मुहिम में अपना पूरा योगदान दे रही हैं। दिवाली के त्योहार पर नैनीताल जिले के कोटाबाग विकासखंड की 25 महिलाएं ऐसी हैं जिन्होंने घर में डेकोरेशन करने वाले झालरों और सजावटी लाइटों को एक अनोखा रूप दिया है और ये झालर चाइनीस झालरों को जमकर टक्कर दे रहे हैं। नैनीताल जिले के कोटाबाग विकासखंड की 25 महिलाएं चाइनीस प्रोडक्ट्स को पछाड़ने के लिए प्रतिदिन 7 घंटे काम कर रही हैं और ऐसी बिजली की झालर और लाइटिंग तैयार कर रही हैं जो ना तो पानी से खराब होती है और ना ही एक बल्ब खराब होने के बाद पूरी झालर खराब हो जाती है। लोकल बाजारों में सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं द्वारा निर्मित इन सजावटी झालरों को लोगों द्वारा काफी पसंद किया जा रहा है।
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भारतीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए नैनीताल में भी इस मुहिम को बढ़ावा मिल रहा है। लोकल उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए और आत्मनिर्भर बन अपनी आर्थिकी मजबूत करने के लिए कुल 25 महिलाएं अपना योगदान दे रही हैं। इन महिलाओं को बिजली की मालाएं बनाने का गुर सिखा रही हैं पहाड़ की मीना डोगरा। मीना ने 10 से 12 साल कंपनी में काम किया और उसके बाद उन्होंने एक इलेक्ट्रॉनिक की दुकान में अपने इस हुनर को तराशा। अब उनको नाबार्ड की ओर से गठित स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का जिम्मा सौंपा गया है और वह इस को बखूबी पूरा कर रही हैं। वे ग्रामीण महिलाओं को बिजली की मालाएं और झालर बनाना सिखा रही हैं जो दिवाली में लोगों के घर पर सज कर उनके घरों की रौनक बढ़ा देंगे। मीना डोगरा ने बताया कि यह महिलाएं काफी तेजी से काम कर रही हैं। सुबह 10 बजे से लेकर शाम के 5 बजे तक यह महिलाएं रोजाना तकरीबन 60-70 झालर और बिजली की मालाएं तैयार कर रही हैं, जिनकी मार्केट में खूब डिमांड है और यह बहुत ही तेजी से बिक रहे हैं।
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मीना डोगरा ने बताया कि इन झालरों और लड़ियों की खास बात है कि यह है कि यह चाइनीस झालरों की तरह जल्दी खराब नहीं होते हैं। चाइनीस झालर में यदि एक या दो बल्ब खराब हो गए तो पूरी झालर ही बेकार हो जाती है मगर जो झालर और मालाएं नैनीताल के स्वयं सहायता समूह की महिलाएं बना रही हैं उनकी खासियत यह है 1-2 बल्ब खराब होने के बावजूद भी झालर बिल्कुल ठीक रहते हैं। चाइनीस झालरों में पानी पड़ने से शॉर्ट सर्किट का खतरा रहता है मगर इन झालरों में पानी से कोई खतरा नहीं है और पानी पड़ने से यह खराब नहीं होंगे। मीना डोगरा ने बताया कि स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को एलइडी बल्ब भी बनाना सिखाया जा रहा है। कुछ समय पहले तक महिलाएं 1 दिन में 1000 एलईडी बल्ब बना रही थीं। फिलहाल कच्चा माल ना मिलने के कारण एलईडी बल्ब बनाने का काम बंद कर दिया गया है। कुल मिलाकर बात यह है कि देश की आर्थिकी मजबूत करने के लिए इस दिवाली और आने वाले हर त्योहार पर हम अपने लोकल दुकानदारों से ही सामान लें और देश की आर्थिकी मजबूत करें। लोगों के बीच भी लोकल फॉर वोकल का क्रेज बढ़ता नजर आ रहा है और वे लोकल दुकानदारों से ही सामान खरीद रहे हैं। नैनीताल की यह महिलाएं भी स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपनी आर्थिकी को मजबूत बना रही हैं और समाज में आत्मनिर्भरता का नारा बुलंद कर रही हैं।