जिस उम्र में ज्यादातर युवा इंटरनेट की लत और फनी मीम्स बनाने में व्यस्त रहते हैं, उस उम्र में मयंक ने कड़ी मेहनत कर वह उपलब्धि हासिल कर ली, जो उनकी उम्र के दूसरे हजारों युवाओं के लिए कल्पना से भी परे है।
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Komal Negi
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No reels. No crowds. Just Kedar Himalaya - This trek doesn’t want to be famous..
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Image: Mayank rawat of rudraprayag became nuclear scientist
रुद्रप्रयाग: वैज्ञानिक...वो सुपरहीरो जो विज्ञान की मदद से दुनिया की समस्याएं सुलझा सकते हैं। पहाड़ के एक होनहार नौजवान को भी वैज्ञानिक बनकर देश के लिए कुछ कर दिखाने का मौका मिला है। जिस युवा की हम बात कर रहे हैं, उनका नाम मयंक रावत है। मयंक रुद्रप्रयाग की ऊखीमठ तहसील के अंतर्गत आने वाली क्यूंजा घाटी से ताल्लुक रखते हैं। कंडारा गांव के रहने वाले मयंक का चयन इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र कलपक्कम, चेन्नई में हुआ है। जहां वो परमाणु वैज्ञानिक के तौर पर सेवाएं देंगे। जिस उम्र में ज्यादातर युवा इंटरनेट की लत और फनी मीम्स बनाने में व्यस्त रहते हैं, उस उम्र में मयंक ने कड़ी मेहनत कर वह उपलब्धि हासिल कर ली है, जो उनकी उम्र के दूसरे हजारों युवाओं के लिए कल्पना से भी परे है।
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मयंक रावत ने अपनी सफलता से साबित कर दिया कि पहाड़ से सिर्फ फौजी ही नहीं वैज्ञानिक भी निकल सकते हैं। देश के विकास और उसकी सुरक्षा में योगदान दे सकते हैं। चलिए अब आपको मयंक के बारे में और डिटेल देते हैं। मयंक के पिता विजयपाल सिंह रावत पौड़ी जिले में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के पद पर तैनात हैं। माता कमला रावत गृहणी हैं। मयंक ने अपनी पढ़ाई पहाड़ में ही की है। उन्होंने साल 2012 में केवी अगस्त्यमुनि से हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण की। बाद में उनका नवोदय विद्यालय में चयन हो गया। साल 2014 में उन्होंने नवोदय विद्यालय जाखधार से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की।
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साल 2015 में मयंक रावत ने एनआईटी श्रीनगर गढ़वाल में बीटेक में प्रवेश लिया। यहां से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। बाद में उनका चयन आईआईटी मद्रास में हो गया। वर्तमान में वह आईआईटी मद्रास से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं। अब मयंक रावत का चयन (IGCAR) कलपक्कम, चेन्नई में परमाणु वैज्ञानिक के पद पर हुआ है। मयंक की शानदार उपलब्धि ने पूरे उत्तराखंड को गौरवान्वित किया है। उनके गृह जिले में जश्न का माहौल है। राज्य समीक्षा टीम की तरफ से भी होनहार मयंक को उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं। उनकी सफलता पहाड़ के दूसरे युवाओं को भी विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।