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90% ट्रेकर्स नहीं जानते केदार हिमालय के ये सीक्रेट रूट्स
प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
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चमोली: चमोली में बीते रविवार को जो आपदा आई उससे समस्त उत्तराखंड अब तक सदमे में है। इसी बीच एक और बुरी खबर सामने आई है। चमोली जिले में नंदाकिनी नदी के किनारे शिलासमुद्र ग्लेशियर भी अब खतरे की जद में है। जी हां, बताया जा रहा है कि शिलासमुद्र के ठीक नीचे ग्लेशियर की तलहटी पर दो छेद हैं और उसके आसपास दरारे हैं जो कभी भी कहर बरपा सकती हैं। जानकारों की मानें तो अगर उत्तराखंड में बड़ा भूकंप आता है और यह शिलासमुद्र ग्लेशियर फट जाता है तो कई शहरों का नामोनिशान तक मिट सकता है और उत्तराखंड में एक बड़ी तबाही आ सकती है। नंदाकिनी नदी के किनारे शिलासमुद्र ग्लेशियर पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी तंत्र का एक अहम हिस्सा है। इस ग्लेशियर में दुर्लभ प्रकार के जीव जंतु भी पाए जाते हैं और यह लगभग 8 किलोमीटर के परिक्षेत्र में फैला हुआ है जो गढ़वाल हिमालय के इकोसिस्टम में भी एक अहम भूमिका निभाता है।