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90% ट्रेकर्स नहीं जानते केदार हिमालय के ये सीक्रेट रूट्स
प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
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अल्मोड़ा: कोरोना काल ने हम में से ज्यादातर लोगों की जिंदगी मुश्किल बना दी। कई लोगों की जॉब चली गई। नौकरी चले जाने के बाद जहां कई लोग हाथ पर हाथ धरकर हालात सुधरने का इंतजार करने लगे, तो वहीं कुछ लोग ऐसे भी थे जिन्होंने इस मौके को एक नई शुरुआत के रूप में देखा। अल्मोड़ा के नरेंद्र सिंह बिष्ट ऐसी ही शख्सियत हैं। शीतलाखेत नौला गांव में रहने वाले नरेंद्र ने महासंकट में उपजे हालात में गांव में लिलियम की खेती शुरू की। अब पहाड़ के इस नौजवान के गांव में उगे एशियाटिक प्रजाति के विदेशी फूलों की महक गाजीपुर मंडी तक पहुंचने लगी है। जुनूनी युवक का प्रयोग गांव के दूसरे युवाओं को भी प्रेरणा दे रहा है। नरेंद्र पिथौरागढ़ में संविदा पर वन विभाग में तैनात थे। पिछले साल लॉकडाउन में उनकी जॉब चली गई, लेकिन नरेश निराश नहीं हुए। वो गांव लौटे और ऐसे फूल उगाने की ठानी, जिनकी मांग और महत्व ज्यादा हो। इसी दौरान नरेंद्र को गांव में हॉलैंड के लिलियम फूल की खेती करने का आइडिया आया। उन्हें पता चला कि हर बड़े सेमिनार में मंचों और सभागारों की सजावट में लिलियम का खूब इस्तेमाल होता है। बस फिर क्या था नरेंद्र ने गांव में लिलियम के फूल उगाने की जिद पकड़ ली। नरेंद्र का जज्बा देख उद्यान विभाग ने भी मदद की। आगे पढ़िए