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Untouched Trekking Routes in Kedar Himalaya, Uttarakhand
Lesser-known treks offering breathtaking Himalayan views. A perfect blend of adventure, solitude, and spirituality.
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पौड़ी गढ़वाल: 23 अप्रैल 1930 का दिन था, इस दिन पेशावर में विशाल जुलूस निकाला गया था। इस जुलूस में बच्चों, बूढ़ों और महिलाओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। आजादी की मांग कर रहे हजारों लोगों के नारों से आसमान गूंज उठा था । दूसरी तरफ अंग्रेजों का भी खून खौल रहा था। इस बीच अंग्रेजों ने 2/18 रॉयल गढ़वाल राइफल्स को आदेश दिया कि प्रदर्शनकारियों पर हर हाल में नियंत्रण किया जाए। 2/18 रॉयल गढ़वाल राइफल्स की एक टुकड़ी काबुली फाटक के पास तैनात की गई। आंदोलन करने वालो के पास हथियार नहीं थे। अंग्रेज कंमाडर ने जैसे ही आदेश दिया तो सत्याग्रहियों को घेर लिया गया। गढ़वाल राइफल के सैनिकों को जुलूस को तितर बितर करने के लिये कहा गया। लेकिन आंदोलनकारियों के आगे अंग्रेज कमांडर का धैर्य जवाब दे गया। अंग्रेज कमांडर ने कहा ""गढ़वालीज ओपन फायर""। यहां से उदय हुआ वीर चंद्र सिंह गढ़वाली का । वो कमांडर के पास में खड़े थे। वो कड़कती आवाज में बोले ""गढ़वाली सीज फायर""। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली की हुंकार से सभी राइफलें नीचे हो गयी। अंग्रेज कमांडर बौखला उठा। उस कमांडर ने कभी सोचा भी नहीं था कि एक पहाड़ी गर्जना के आगे उसका आदेश हवा हो जाएगा। दरअसल वीर चंद्र सिंह गढ़वाली ने सैनिकों को पहले ही इस बारे में बता दिया था। उन्होंने कहा था कि कुछ भी हो जाए पर निहत्थों पर हथियार नहीं उठाएंगे। आगे पढ़िए