Advertisement
90% ट्रेकर्स नहीं जानते केदार हिमालय के ये सीक्रेट रूट्स
प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
Example Ads Media
पौड़ी गढ़वाल: उत्तराखंड आपदा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील राज्य है। यहां प्राकृतिक घटनाओं में अबतक कई बेकसूरों की जान जा चुकी है। राज्य में 2013 में आई आपदा के बाद उत्तराखण्ड में डॉप्लर वेदर रडार लगाए जाने की माँग उठी। अब यह मांग क्यों उठी यह भी जान लीजिए। डाप्लर रडार लगाए जाने की माँग की एक बड़ी वजह थी मौसम विभाग द्वारा प्रदेश में 16 जून 2013 को आई प्राकृतिक आपदा के बारे में सटीक जानकारी देने में असक्षम होना। आपको जानकारी के लिए बता दें कि उत्तराखंड मौसम विभाग को बादलों के निर्माण से सम्बन्धित सूचना के लिये दिल्ली और पटियाला पर आश्रित रहना पड़ता है। इन केन्द्रों से प्रसारित सूचना के आधार पर ही यहाँ बारिश से सम्बन्धित अलर्ट जारी किये जाते हैं। इसका सबसे बड़ा नेगेटिव पॉइंट् यह है कि इन केन्द्रों से प्राप्त सूचनाएँ पूरे उत्तराखण्ड को कवर नहीं कर पाती हैं। अत्यधिक बारिश, आँधी, बर्फबारी आदि से प्रभावित उत्तराखण्ड में मौसम सम्बन्धी सटीक सूचना प्रसारित नहीं कर पाता। ऐसे में उत्तराखंड में डाप्लर रडार बेहद जरूरी है। उत्तराखंड सरकार ने इसी को मध्यनजर रखते हुए सामरिक और पर्यटन के लिहाज से महत्वूर्ण लैंसडाउन में डाप्लर राडार लगाने के लिए 44 लाख रुपये मंजूर कर दिए हैं।