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पिथौरागढ़: रोटी-बेटी का रिश्ता रखने वाला नेपाल अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। लंबे समय से भारत पर आरोप लगाने के मौके तलाशते आ रहे नेपाल ने एक बार फिर भारत के ऊपर उत्तराखंड के धारचूला में जमीन पर कब्जा करने का आरोप लगाया है। नेपाल का आरोप है कि भारत नेपाल में काला पानी किनारे उसकी जमीन में तटबंध बना रहा है और भारत ने जमीन जबरन कब्जे में ले रखी है। नेपाल के अधिकारियों ने भारतीय अधिकारियों को इस मामले में सख्त कदम उठाने को कहा है और इस पूरे मामले में अपनी आपत्ति भी जताई है। हालांकि भारत ने भी नेपाल की हरकतों पर चुप नहीं बैठते हुए करारा जवाब दे दिया है। चलिए आपको बताते हैं कि आखिर यह पूरा मामला है क्या और क्यों आखिर नेपाल भारत के ऊपर आरोप लगा रहा है। 2013 की आपदा तो याद है ना आपको। 2013 की आपदा ने धारचूला में काली नदी किनारे जमकर तबाही मचाई थी और तब भारत में नदी किनारे तटबंध नहीं होने के कारण नदी ने अपना रुख भारत की तरफ किया था।
इसके बाद भारत ने अपने यहां नदी के बहाव से खतरे को रोकने के लिए तटबंध बनाए थे जिस पर नेपाल के अधिकारियों को बड़ी समस्या हो रही है और उन्होंने इस पर आपत्ति जताई है। नेपाल ने कहा है कि भारत उसके भूभाग पर कब्जा करना चाह रहा है। इस पूरे मामले में नेपाल की आपत्ति पर भारत और नेपाल के अधिकारियों की टीम पहले ही संयुक्त सर्वेक्षण भी कर चुकी है। मगर इसके बावजूद भी नेपाल ने अपना विरोध वापस नहीं लिया है। नेपाल अपने रुख पर अडिग है। इधर भारत ने भी नेपाल को मुंहतोड़ जवाब देते हुए आरोपों को सिरे से खारिज तो किया ही किया इसी के साथ भारत में प्रशासन ने कहा है कि नदी की तरफ अपना बहाव रोकने के लिए तटबंध बनाया जा रहा है ऐसे में नेपाल की भूमि पर निर्माण का आरोप सरासर गलत है और झूठ है।