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वह पढ़ना चाहती है। पढ़-लिखकर स्वतंत्र होना चाहती है मगर शायद उसकी किस्मत में चुनौतियां लिखी हैं। उसके माता-पिता और उसकी बुआ उसको पढ़ाई में सपोर्ट नहीं कर रहे हैं। यहां तक कि उन्होंने उसकी किताबें भी जला दी हैं। वहीं बालिका ने तंग आकर मुख्य शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखा है और उसने पढ़ाई के लिए मदद की गुहार लगाई है। उसने कहा है कि अगर उसे शिक्षा विभाग से मदद नहीं मिलती है तो उसका जीवन अंधकार में चला जाएगा। दरअसल बीते सोमवार को पुंगरघाटी के कमद गांव की बबीता कालाकोटी ने मुख्य शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपा है। बबीता ने इसमें लिखा है कि वह आठवीं कक्षा की छात्रा है और वर्तमान में बालिका इंटर कॉलेज में पढ़ रही है। घरेलू परेशानियों के कारण वह हफ्ते में चार या पांच दिन ही विद्यालय जा पाती है। उसने बताया कि उसके घर का गुजारा भी बहुत मुश्किल से होता है। आगे पढ़िए
उसका पालन पोषण उसकी स्वर्गीय दादी कुसमा देवी ने किया मगर 4 महीने पहले उनका देहांत हो गया और उनकी पारिवारिक पेंशन भी बंद हो गई जिस वजह से उनको घर चलाना भी बेहद मुश्किल हो रहा है। वह अपनी बुआ के साथ रहती है लेकिन उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। उसने पत्र में यह भी लिखा कि उसके माता-पिता भी मानसिक रूप से बीमार हैं। उसने मुख्य शिक्षा अधिकारी से मदद की गुहार लगाते हुए कहा है कि उसे कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में प्रवेश दिलाया जाए। उसने लिखा कि उसके परिजन उसको पढ़ाई में सपोर्ट नहीं करते हैं और उन्होंने उसकी कॉपी किताबें और कपड़े भी जला दिए हैं। कभी-कभी उसे कमरे में बंद कर दिया जाता है और कभी-कभी वह रात में घर पर अकेली भी रहती है। वहीं पुंगरघाटी विकास मंच के संयोजक हरीश कालाकोटी, एडवोकेट राजेश रौतेला ने जिला प्रशासन से बेटी की सुरक्षा और उसके पढ़ने-लिखने की उचित व्यवस्था करवाने की मांग की है।