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Untouched Trekking Routes in Kedar Himalaya, Uttarakhand
Lesser-known treks offering breathtaking Himalayan views. A perfect blend of adventure, solitude, and spirituality.
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देहरादून: देहरादून और ऋषिकेश...ये दोनों शहर अपनी खूबसूरत वादियों और स्वच्छ आबोहवा के लिए मशहूर रहे हैं।
हालांकि बदलते वक्त के साथ इन शहरों में प्रदूषण भी बढ़ा है, जिसके लिए शहर में दौड़ रहे डीजल और पेट्रोल से चल रहे वाहन सबसे ज्यादा जिम्मेदार हैं। अब इन दोनों शहरों की सेहत सुधारने के लिए शहर में डीजल और पेट्रोल से चलने वाले ऑटो-विक्रमों को सड़क से बाहर किया जा सकता है। एक नंवबर को गढ़वाल आयुक्त कैंप कार्यालय में संभागीय परिवहन प्राधिकरण (आरटीए) की बैठक होने वाली है, जिसमें ऑटो और विक्रमों की वजह से फैल रहा प्रदूषण अहम मुद्दा रहेगा। फिलहाल सरकार का फोकस देहरादून-ऋषिकेश पर है, लेकिन हरिद्वार और रुड़की से भी ऑटो-विक्रम हटाए जा सकते हैं, क्योंकि संभागीय परिवहन प्राधिकरण के आदेश इन क्षेत्रों में भी लागू होते हैं। आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने देहरादून और ऋषिकेश को राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत चयनित किया है।
मार्च 2023 तक इन शहरों को प्रदूषण मुक्त बनाने की योजना है। ऐसे में आरटीए अगले चार महीने में डीजल-पेट्रोल से चलने वाले ऑटो-विक्रम को सड़क से बाहर करने की तैयारी कर रहा है। आखिरी फैसला आरटीए की बैठक में होगा। आरटीए यह भी विचार कर रहा है कि अगर कोई विक्रम की जगह बीएस-6 सवारी गाड़ी लेता है तो उसका परमिट भी परिवर्तित कर दिया जाए। इसी तरह पेट्रोल-डीजल ऑटो-विक्रम के परमिट पर संचालक सीएनजी वाले ऑटो-विक्रम ले सकते हैं। आरटीओ प्रशासन दिनेश पठोई ने कहा कि विक्रम-ऑटो को बाहर करने के फैसले पर आरटीए की बैठक में फैसला होगा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी प्रदूषण कम करने के लिए कार्ययोजना तैयार की है। इसमें हमारा विभाग भी शामिल है। प्रदूषण कम करने के लिए डीजल-पेट्रोल से चलने वाले ऑटो-विक्रम को मार्च 2023 तक सड़क से बाहर करने के एनजीटी के आदेश हैं।