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देहरादून: डॉक्टर लोगों की जान बचाते हैं, लेकिन क्या हो जब डॉक्टर ही फर्जी हो। देहरादून में कुछ इसी तरह फर्जीवाड़ा कर डॉक्टरों की खेप तैयार की जा रही थी।
यहां बीएएमएस की फर्जी डिग्री से प्रैक्टिस करने वाले दो डॉक्टर पकड़े गए हैं। दोनों डॉक्टरों के पास फर्जी डिग्री थी, डराने वाली बात ये है कि फर्जी डॉक्टर लंबे वक्त से लोगों का इलाज कर रहे थे, न जाने इनके मरीजों का क्या हाल होगा। बुधवार को इनकी गिरफ्तारी के साथ ही कॉलेज के संचालक को भी गिरफ्तार किया गया। आरोपी संचालक कर्नाटक की यूनिवर्सिटी की फर्जी डिग्री दे रहा था। जिसके लिए 8 लाख रुपये लिए जा रहे थे। इस मामले में बाबा ग्रुप ऑफ कॉलेज मुजफ्फरनगर का संचालक इमरान और इखलाख की भी गिरफ्तारी हुई है। अब तक मिली जानकारी के अनुसार 36 लोगों के फर्जी डिग्री से उत्तराखंड में प्रैक्टिस करने की पुष्टि हुई है। एसटीएफ को आरोपियों के पास से ब्लैंक डिग्री और मुहर भी मिली। एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आयुष अग्रवाल ने बताया कि बीते दिनों शिकायत मिली थी की प्रदेश के कई आयुर्वेदिक चिकित्सकों के पास बीएएमएस की फर्जी डिग्री है।
ये लोग रजिस्ट्रेशन कराकर जगह-जगह अपने अस्पताल और क्लीनिक चला रहे थे। जांच के दौरान ऐसे करीब 36 डॉक्टरों को चिन्हित कर उनके संबंध में संबंधित चिकित्सा बोर्ड से सूचना मांगी गई तो ज्यादातर फर्जी आयुर्वेदिक चिकित्सकों की डिग्री राजीव गांधी हेल्थ एण्ड साईस यूनिवर्सिटी कर्नाटका की पाई गई, जो कि पूरी तरह फर्जी है। ये डिग्री बाबा ग्रुप ऑफ कॉलेज मुजफफरनगर के मालिक इमरान और इमलाख द्वारा तैयार करायी गई है। एसटीएफ ने आयुर्वेदिक चिकित्सक प्रीतम सिंह एवं मनीष अली को गिरफ्तार किया है। साथ ही एसटीएफ की दूसरी टीम ने मुजफ्फरनगर में दबिश देकर फर्जी डिग्री देने वाले इमरान और इखलाख को भी गिरफ्तार किया है। इमरान ने पूछताछ के दौरान उत्तराखंड एवं कई अन्य राज्यों में सैकड़ों डॉक्टरों को इस तरह की फर्जी डिग्री लाखों रुपए लेकर देने की बात बताई है।