रोशनी कहती हैं कि मैं अपने घर-समाज से प्रताड़ित हूं। मैं मौत को गले लगा लूंगी, लेकिन अब अपने समुदाय में वापस नहीं जाऊंगी।
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कोमल नेगी
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Image: Almora Roshan Banu converted to Hinduism
अल्मोड़ा: रानीखेत में अपने स्वजनों के अत्याचार और प्रताड़ना से परेशान रोशन बानो ने एक ऐसा कदम उठाया, जिसके लिए हिम्मत की जरूरत होती है।
Almora Roshan Banu converted to Hinduism
रोशन बानो ने अपने समुदाय को छोड़ दिया और सनातन धर्म अपनाकर हिंदू बन गईं। अब वो रोशनी के नाम से जानी जाएंगी। रोशनी कहती हैं कि उसके समुदाय में रिश्तेदारों में ही शादी करा दी जाती है, ये परंपरा उसे हमेशा खटकती आई है। अत्याचार के खिलाफ बोलने वाली नारी को गलत ठहरा कर उसके खिलाफ फतवा जारी कर दिया जाता है। जबकि सनातन धर्म में हमेशा लड़कियों और महिलाओं के हक की बात की जाती है। इसी ने उसे मुस्लिम धर्म छोड़कर सनातन धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया। बीते दिसंबर में प्रशासन की अनुमति मिलने के बाद रोशनी ने चार दिसंबर को आर्य समाज मंदिर हल्द्वानी में स्वेच्छा से सनातन धर्म को अपना लिया। रोशनी बताती हैं कि उन्होंने अपने घर में महिलाओं पर अत्याचार होते देखा है। आगे पढ़िए
वो घर में सबसे बड़ी हैं। साल 2012 में उन्होंने बरेली से नर्सिंग का कोर्स पूरा किया और हवालबाग ब्लॉक में तैनाती ली। जॉब के साथ एसएसजे कैंपस अल्मोड़ा से बीए फिर एमए किया। 2017 में नागरिक चिकित्सालय रानीखेत में बतौर नर्स ज्वाइन किया। अपना करियर संवारने के साथ भाई को बीएड, दूसरी बहन को नर्सिंग कालेज में दाखिला दिलाया, सबसे छोटी को उच्च शिक्षा दिलाई। मगर उसे तुच्छ माना गया। जो मकान रोशनी ने बैंक से लोन लेकर बनाया था, उस मकान को हथियाने के लिए भाई ने उसके साथ मारपीट की। पिता बशीर अहमद भी उसे प्रताड़ित करते रहे। ये सब बर्दाश्त से बाहर हुआ तो साल 2022 में रोशनी ने स्वजनों से रिश्ता तोड़ उन्हें अपनी संपत्ति से बेदखल कर दिया। रोशनी कहती हैं कि मैं अपने घर समाज से प्रताड़ित हूं। मेरा मानसिक संतुलन बिगाड़ा गया, मैंने डिप्रेशन की दवाएं खाई। मुझे मरना पसंद है, लेकिन अब अपने समुदाय में वापस नहीं जाऊंगी।