उत्तराखंड में अब नकल करने वालों की खैर नहीं, लगगेगा 10 करोड़ का जुर्माना

प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल करने वालों की खैर नहीं, लगेगा दस करोड़ तक का जुर्माना..पढ़िए पूरी खबर
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Image: uttarakhand anti copying law

देहरादून: प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल करने की अब तक कई मामले सामने आ चुके हैं।

Uttarakhand anti copying law

यूकेपीएससी हो या कोई अन्य विभागीय परीक्षा, कई अभ्यर्थी पहले से ही जुगाड़ बैठा कर प्रश्न पत्र लीक करवा लेते हैं और परीक्षा अच्छे नंबरों से क्लियर कर लेते हैं। ऐसे नकलबाजों के चक्कर में कई डिजर्विंग कैंडिडेट रह जाते हैं। इन परीक्षाओं में नकल करने वाले की वजह से कई परीक्षाओं को रद्द किया जा चुका है या फिर पुनः संचालित करने के आदेश मिलते हैं जिससे जो अभ्यर्थी उन परीक्षाओं को क्लियर कर चुके होते हैं उनको दोबारा से वह परीक्षा देनी पड़ती है और उनके हाथ से सुनहरा मौका चला जाता है। ऐसे में जरूरत है कि उत्तराखंड में प्रतियोगी परीक्षा में नकल करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही और कदम उठाए जाएं और इसी कड़ी में उत्तराखंड सरकार के नकल विरोधी कानून को राजभवन ने मंजूरी दे दी है।

पुष्कर सिंह धामी सरकार ने हाल ही में नकल विरोधी कानून को राजभवन में प्रस्तावित किया था जिसका मंजूरी मिल चुकी है। अब औपचारिक अधिसूचना के साथ ही यह भी लिखित रूप से कानून का रूप ले लेगा। इस नकल विरोधी कानून के तहत कड़ी सजा का प्रावधान भी तय है।दरअसल गैरसैण में मार्च में हुए बजट सत्र में उत्तराखंड सरकार प्रतियोगी परीक्षा विधेयक 2023 लाई थी और महीने भर के बाद इस कानून को राज्यपाल ने मंजूरी दे दी है और जल्द ही इसकी अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। इस कानून के तहत जो भी पहली बार नकल करता हुआ पाया गया उसको 3 साल की सजा और 5 लाख का जुर्माना है। दूसरी बार पकड़े जाने पर 10 साल की सजा और 10 लाख जुर्माना लगेगा। उसके बाद भी अगर वह चीटिंग करता हुआ पाया गया तो उम्र कैद और 10 करोड़ तक का जुर्माना प्रस्तावित है।