उत्तराखंड-हिमाचल में इन 5 वजहों से मच रही है तबाही, जानिए वैज्ञानिकों ने क्या कहा

मौसम के बदलते पैटर्न और ग्लोबल वॉर्मिंग पर जारी चर्चा के बीच उत्तराखंड वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के डायरेक्टर काला चंद साई ने भूस्खलन के पांच कारण बताए हैं।
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Uttarakhand Landslide 5 Reasons: 5 reasons for landslides in Uttarakhand
Image: 5 reasons for landslides in Uttarakhand

देहरादून: मानसून की दस्तक के साथ ही उत्तराखंड और हिमाचल में कैसी तबाही मच रही है, ये हम सब देख रहे हैं।

5 reasons for landslides in Uttarakhand

उत्तराखंड में भी कई जगह भूस्खलन की खौफनाक तस्वीरें देखने को मिली हैं, लेकिन इसकी असली वजह क्या है, ये अब तक पता नहीं चल सका है। मौसम के बदलते पैटर्न और ग्लोबल वॉर्मिंग पर जारी चर्चा के बीच उत्तराखंड वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के डायरेक्टर काला चंद साई ने भूस्खलन के पांच कारण बताए हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भूस्खलन के लिए एक फैक्टर जिम्मेदार नहीं है, बल्कि तमाम फैक्टर जुड़े हुए हैं। जिसमें क्लाइमेटिक फैक्टर, एंथ्रोपोजेनिक एक्टिविटी, एनवायरमेंटल डिग्रेडेशन,एक्सेसिव रेनफॉल और नैचुरल एक्टिविटी शामिल हैं। इन सभी फैक्टर्स की वजहों से ही हिमाचल और उत्तराखंड में भूस्खलन की समस्या देखी जा रही है। आगे पढ़िए

क्लाइमेटिक फैक्टर यानी जलवायु में आया परिवर्तन भूस्खलन को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा रहा है। इसी तरह एनवायरनमेंटल डिग्रेडेशन (Environment Degradation) यानी पर्यावरण क्षरण से भी भूस्खलन को काफी बल मिला। हिमालयी क्षेत्रों में तापमान में बदलाव देखा जा रहा है। यहां गर्मियों के सीजन में बहुत ज्यादा गर्मी और सर्दी के मौसम में बहुत ज्यादा ठंड पड़ रही है। इसी कारण पहाड़ी के अंदर फैक्टर डेवलप हो जाते हैं, जो कि बाद में भूस्खलन की वजह बनते हैं। एंथ्रोपोजेनिक एक्टिविटी (Anthropogenic Activities)यानि मानवजनित गतिविधियां भी इसकी बड़ी वजह है। संवेदनशील क्षेत्रों में मकान बनाने, भूमि पर क्षमता से अधिक दबाव, सड़क-पुल-टनल बनाने के लिए पहाड़ों का कटान समेत अन्य विकास के कार्यों के चलते भी भूस्खलन की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। एक्सेसिव रेनफॉल (Excessive Rain Fall) भी इसकी वजह हो सकता है। ग्लोबल वॉर्मिंग से दुनियाभर में मौसम चक्र में बड़ा बदलाव आया है।