अब बदरीनाथ धाम की दीवार पर आई दरारें, प्रशासन की टेंशन बढ़ी

चिंता इसलिए भी है क्योंकि बदरीनाथ धाम जोशीमठ शहर से महज 40 किलोमीटर दूर है। जोशीमठ शहर भी भूधंसाव से जूझ रहा है।
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Badrinath Dham Crack: Cracks on the wall of Badrinath Dham
Image: Cracks on the wall of Badrinath Dham

चमोली: बदरीनाथ धाम के मुख्य प्रवेश द्वार सिंह द्वार में दरारें आने से प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। इस बारे में लोगों को बताए बिना एएसआई की टीम को मरम्मत का जिम्मा सौंप दिया गया।

Cracks on the wall of Badrinath Dham

चिंता इसलिए भी है क्योंकि बदरीनाथ धाम जोशीमठ शहर से महज 40 किलोमीटर दूर है। जोशीमठ वही शहर है, जहां साल की शुरुआत में बड़े पैमाने पर भूधंसाव हुआ था। अब बदरीनाथ धाम से चिंता बढ़ाने वाली खबर आई है। यहां सिंह द्वार की भीतरी दीवार में छोटी दरारें और उभार आए हैं। एएसआई की टीम ने दीवार पर पत्थरों को जोड़ने वाले लोहे के क्लैंप को तांबे के क्लैंप से बदलकर मरम्मत शुरू कर दी है। अधीक्षण पुरातत्वविद् (देहरादून सर्कल) मनोज सक्सेना ने इस बारे में जानकारी दी। सिंह द्वार का निर्माण 17वीं शताब्दी के आसपास मंदिर की वर्तमान संरचना के बाकी हिस्सों के साथ किया गया था और यह मुख्य मंदिर परिसर का हिस्सा है।

इसके दोनों ओर कई देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं। धाम आने वाले श्रद्धालु गर्भगृह तक जाने से पहले यहां पर देवताओं की पूजा के लिए रुकते हैं। दरारों को लेकर एएसआई अधिकारियों ने कहा कि ऐसी संभावना है कि जमा हुई बर्फ और वनस्पति के कारण पानी मंदिर की दीवारों में घुस गया, जिससे लोहे के क्लैंप में जंग लग गया और उनकी मजबूती कम हो गई। आखिरी बार सिंह द्वार की मरम्मत का काम साल 1990 में किया गया था। पिछले एक हफ्ते से यहां मरम्मत का काम चल रहा है। एएसआई ने मरम्मत के लिए सरकार को 5 करोड़ रुपये का अनुमान भेजा है। एएसआई अधिकारियों ने कहा कि केंद्र से तेजी से मरम्मत करने के निर्देश मिले थे, राज्य सरकार के संस्कृति विभाग के समन्वय से कार्य किया जा रहा है। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज भी यहां हो रहे निर्माण कार्यों पर नजर बनाए हुए हैं।