उत्तराखंड: बिजली विभाग की नजर में हर सवाल का जवाब ‘शून्य’

आरटीआई के माध्यम से विद्युत विभाग से सरकारी विभागों की बिजली संबंध में मांगी थी सूचना, बिजली विभाग ने बेहद गैरजिम्मेदाराना रवैया अपनाते हुए सभी सवालों के उत्तर में ‘शून्य’ लिखकर जवाब दे दिया।
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electricity department RTI: irresponsible RTI answer by electricity department
Image: irresponsible RTI answer by electricity department

देहरादून: आरटीआई के तहत मांगी गई अहम जानकारी के जवाब में बिजली विभाग ने बेहद गैरजिम्मेदाराना रवैया अपनाते हुए हर सूचना के जवाब में शून्य कहकर पल्ला झाड़ लिया। जी हां! यह सच है।

irresponsible RTI answer by electricity department

चौंकाने वाला रवैया अपनाते हुए सभी सवालों के उत्तर में ‘शून्य’ लिखकर जवाब दे दिया। काशीपुर निवासी आरटीआई कार्यकर्ता कुलदीप सिंह ने सूचना का अधिकार के तहत विद्युत विभाग से सरकारी विभागों में चल रहे बिजली मीटरों की कुल कनेक्शन संख्या, उन पर बकाया बिजली बिल और बकाया वसूली को लेकर अब तक की गई कार्रवाई का ब्यौरा मांगा था। विभागीय अधिकारियों ने आरटीआई के उत्तर में बिना किसी ठोस कारण के इन सभी बिंदुओं पर ‘शून्य’ दर्शाकर जवाब दे दिया।
हैरानी की बात यह है कि वित्त वर्ष के आखिरी माह में बिजली विभाग जोर शोर से बिलों के बकायादारों पर बकायदा वसूली की कार्रवाईकरता है, लेकिन कितनी वसूली की गई, उसका विभाग के पास सिंपल सा जवाब है- शून्य। बिजली विभाग आम उपभोक्ताओं के खिलाफ बिजली चोरी या बकाया बिल को लेकर बेहद सख्त कार्रवाई करता है। मामूली बकाया पर भी पेनल्टी ठोक दी जाती है और अधिकांश मामलों में मुकदमा दर्ज कर दिया जाता है, लेकिन जब बात सरकारी विभागों की आती है तो विभाग की यह ‘शून्य’ वाली कहानी कई सवाल खड़े कर रही है।
इससे अब विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, इससे बड़े घोटाले की आशंका जताई जा रही है।
सवाल यह है कि आखिर सरकारी दफ्तरों के मीटर, बकाया बिल और कार्रवाई का रिकॉर्ड शून्य दर्शा दिए गए हैं, यह कैसे हो सकता है? आरटीआई कार्यकर्ता कुलदीप सिंह का आरोप है कि यह जवाब न सिर्फ सूचना का अधिकार अधिनियम की भावना के खिलाफ है, बल्कि सच्चाई छिपाने का भी संकेत देता है। कहीं ऐसा तो नहीं कि सरकारी विभागों के भारी भरकम बकाया बिल और अनियमितताओं को छिपाने के लिए यह ‘शून्य’ का खेल खेला गया हो। जब आम आदमी से बिजली विभाग सख्ती से वसूली करता है तो सरकारी विभागों के मामले में आखिर सच्चाई क्यों छिपाई जा रही है?