उत्तराखंड में कभी भी आ सकता है महाभूकंप, टेंशन में साइंटिस्ट..उच्च जोखिम वाले जिलों के लिए चेतावनी!

Uttarakhand earthquake: 500-600 वर्षों में इस विशाल क्षेत्र में कोई बड़ा भूकंप नहीं आया। इसका सीधा मतलब हुआ कि उत्तरकाशी, चमोली में आए भूकंपों से भी बड़ा भूकंप आ सकता है। इसकी वजह क्या है ये भी जान लीजिए
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Uttarakhand earthquake: devastating earthquake can strike Uttarakhand says scientist
Image: devastating earthquake can strike Uttarakhand says scientist

देहरादून: रूस का कैमचटका बार-बार क्यों भूकंप की झटकों से डोल रहा है? हाल ही में कैमचटका में 8.8 रिक्टर स्केल का भूकंप आया था। क्यों वैज्ञानिकों ने इसे रिंग ऑफ फायर का नाम दिया था? रिंग ऑफ फायर का मतलब है कैमचटका वाले समुद्री क्षेत्र से जुड़ने वाले तमाम देश, जो कि एक रिंग के आकार में दिखते हैं।

Devastating earthquake can strike Uttarakhand

हम यहां कैमचटका की बात इसलिए कर रहे हैं क्योंकि ऐसा ही खतरा उत्तराखंड और हिमालय से जुड़े राज्यों पर भी मंडरा रहा है। यानी अगर हिमालय इस रिक्टर स्केल की तीव्रता से डोला तो मंजर भयानक होगा। अब बात करते हैं रिसर्च की।

डॉ. परमेश बनर्जी ने क्या कहा ?

नेटवर्क 18 की रिपोर्ट के मुताबिक देहरादून की वाडिया इंस्टीट्यूट के पूर्व वैज्ञानिक और एशियन सिस्मोलॉजिकल कमीशन, सिंगापुर के पूर्व अध्यक्ष डॉ. परमेश बनर्जी का कहना है कि उत्तराखंड समेत पूरा पूर्वोत्तर भारत भूकंप के लिहाज से सबसे ज्यादा जोखिम वाला क्षेत्र है। उनका कहना है कि 500-600 वर्षों में इस विशाल क्षेत्र में कोई बड़ा भूकंप नहीं आया। इसका सीधा मतलब हुआ कि उत्तरकाशी, चमोली में आए भूकंपों से भी बड़ा भूकंप आ सकता है। इसकी वजह क्या है ये भी जान लीजिए..

Uttarakhand earthquake: खतरा क्या है?

ये बात सच है कि उत्तराखंड में छोटे-छोटे भूकंप के झटके आ रहे हैं जिसके कारण वैज्ञानिक इसे सेंट्रल सिस्मिक गैप कहते हैं। इसका मतलब है कि छोटे छोटे भूकंपों की वजह से धरती के भीतर मौजूद ऊर्जा पूरी तरह से बाहर नहीं आ पा रही। इन छोटे भूकंपों के बावजूद वैज्ञानिक कहते हैं कि धरती के भीतर जमा भूकंपीय ऊर्जा का केवल 5 से 6 फीसदी हिस्सा ही अभी तक निकल पाया है। इस ऊर्जा को निकालने के लिए 7 से 8 रिक्टर स्केल से अधिक तीव्रता का भूकंप आवश्यक है। अगर पूरी ऊर्जा निकली तो महासंकट खड़ा होगा।

उत्तराखंड में भूकंप के लिए संवेदनशील क्षेत्र

Uttarakhand ऐसा राज्य है जो earthquake के जोन 4- 5 में आता है, इस पहाड़ी राज्य में उच्च जोखिम वाले क्षेत्र उत्तरकाशी (भटवाड़ी), चमोली, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ जैसे इलाके हैं। खतरा देहरादून के लिए भी कम नहीं है। इन इलाकों में अक्सर छोटे-मोटे झटके महसूस किए जाते हैं। ऐसे में धरती की फिक्र करने वाले वैज्ञानिकों को अब बड़े भूकंप की चिंता सता रही है।