नंदा देवी नेशनल Park में जैव विविधता सर्वेक्षण के दौरान हिमालयन थार, काला भालू, साइबेरियन विजल समेत कई दुर्लभ वन्यजीव दिखाई दिए। 40 कैमरा ट्रैप से हिम तेंदुए समेत अन्य प्रजातियों की नई जानकारी मिलने की उम्मीद।
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: Rare wildlife found in Nanda Devi National Park
चमोली: उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध नंदा देवी नेशनल पार्क में चल रहे जैव विविधता निगरानी अभियान से उत्साहजनक संकेत सामने आए हैं। अभियान के अंतिम चरण में पहुंची टीम को कई दुर्लभ वन्यजीवों के प्रत्यक्ष दर्शन हुए हैं, जबकि हिम तेंदुआ (स्नो लेपर्ड) और रेड फॉक्स जैसे दुर्लभ जीवों की मौजूदगी के भी महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं।
Rare wildlife found in Nanda Devi National Park
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार टीम अब अभियान के अंतिम पड़ाव सरसो पताल तक पहुंच चुकी है, जहां से लौटने के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। नंदा देवी नेशनल पार्क में जैव विविधता और वन्यजीवों की स्थिति का आकलन करने के लिए यह विशेष अभियान हर दस वर्ष में आयोजित किया जाता है। इस बार अभियान की शुरुआत 7 जून को हुई थी। कई दिनों तक दुर्गम हिमालयी क्षेत्रों में पैदल सर्वेक्षण करने के बाद टीम अब अंतिम चिन्हित स्थल सरसो पताल तक पहुंच गई है। अभियान के दौरान वन्यजीव विशेषज्ञों और वन कर्मियों की टीम को कई दुर्लभ प्रजातियों के प्रत्यक्ष दर्शन हुए हैं। टीम ने जिन प्रमुख वन्यजीवों को देखा उनमें हिमालयन थार, साइबेरियन विजल, काला भालू, भरल (ब्लू शीप), पिका और अन्य पर्वतीय वन्यजीव शामिल हैं। इन वन्यजीवों की मौजूदगी क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता का संकेत मानी जा रही है।
हिम तेंदुए और रेड फॉक्स की मौजूदगी के मिले संकेत
नंदा देवी नेशनल पार्क के डीएफओ अभिमन्यु के अनुसार टीम को हिम तेंदुआ (स्नो लेपर्ड) और रेड फॉक्स सहित 11 अन्य स्तनधारी वन्यजीवों के स्कैट (मल) भी मिले हैं। वन्यजीव विज्ञान में स्कैट को किसी जीव की उपस्थिति का महत्वपूर्ण प्रमाण माना जाता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि ये दुर्लभ प्रजातियां अब भी इस क्षेत्र में सक्रिय हैं।
40 कैमरा ट्रैप से सामने आ सकती हैं नई जानकारियां
अभियान के दौरान टीम ने पार्क के विभिन्न संवेदनशील स्थानों पर 40 कैमरा ट्रैप लगाए हैं। वन अधिकारियों का मानना है कि इन कैमरों में कैद होने वाली तस्वीरें और वीडियो कई नई जानकारियां सामने ला सकती हैं। खासकर हिम तेंदुए और अन्य दुर्लभ वन्यजीवों की गतिविधियों को लेकर महत्वपूर्ण डेटा मिलने की संभावना है। टीम वापसी के दौरान इन कैमरा ट्रैप्स को हटाएगी और रिकॉर्ड की गई सामग्री का विश्लेषण किया जाएगा।
वनस्पतियों का भी हो रहा अध्ययन
वन्यजीवों के साथ-साथ टीम क्षेत्र की वनस्पतियों और पारिस्थितिक तंत्र का भी विस्तृत अध्ययन कर रही है। विशेषज्ञ विभिन्न ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पौधों की प्रजातियों, उनके वितरण और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का आकलन कर रहे हैं। यह अध्ययन भविष्य की संरक्षण नीतियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दो दिन सरसो पताल में रहेगा दल
वन विभाग के अनुसार टीम सरसो पताल क्षेत्र में दो दिन और ठहरेगी। इसके बाद वापसी का सफर शुरू होगा। अभियान से लौटने के बाद सभी आंकड़ों, कैमरा ट्रैप फुटेज, वनस्पति अध्ययन और वन्यजीवों से संबंधित जानकारियों को संकलित कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालयी क्षेत्रों में वन्यजीवों की वास्तविक स्थिति जानने और संरक्षण रणनीति तैयार करने के लिए ऐसे अभियान बेहद महत्वपूर्ण हैं। नंदा देवी बायोस्फीयर क्षेत्र देश के सबसे संवेदनशील और समृद्ध पारिस्थितिक क्षेत्रों में गिना जाता है, जहां हिम तेंदुआ, कस्तूरी मृग, भरल और कई दुर्लभ पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं।