गढ़वाल: प्रसव पीड़ा में 4 घंटे तड़पती रही गर्भवती, समय पर इलाज न मिलने से मां-बच्चे की मौत

पहाड़ में स्वास्थ्य सुविधा की कमी के चलते एक और गर्भवती महिला की मौत हो गई, महिला के दो बच्चे अनाथ हो गए हैं। इस घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है...
Advertisement No reels. No crowds. Just Kedar Himalaya - This trek doesn’t want to be famous..

Alpine meadows, dense forests, and snow-capped peaks in one journey. Suitable for both beginner and experienced trekkers.

Example Ads Media
Mother and unborn baby death: Pregnant Woman and Unborn Baby Die After Delay in Treatment
Image: Pregnant Woman and Unborn Baby Die After Delay in Treatment

चमोली: उत्तराखंड के चमोली जिले से स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक बेहद दुखद मामला सामने आया है। थराली ब्लॉक के कुराड़ गांव की 35 वर्षीय सरिता देवी की प्रसव के दौरान मौत हो गई। महिला के गर्भ में पल रहे शिशु की भी जान नहीं बच सकी। घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठाते हुए अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।

Pregnant Woman, Unborn Baby Die After Delay in Treatment

परिजनों के अनुसार, सोमवार रात सरिता देवी को प्रसव पीड़ा शुरू हुई, जिसके बाद ग्रामीण उन्हें तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र थराली लेकर पहुंचे। आरोप है कि महिला करीब चार घंटे तक अस्पताल में प्रसव पीड़ा से जूझती रही, लेकिन स्थिति में सुधार न होने पर काफी देर बाद उसे कर्णप्रयाग हायर सेंटर रेफर किया गया। बताया गया कि कर्णप्रयाग ले जाते समय एंबुलेंस में ही महिला और गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई।

परिजनों ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर उठाए सवाल

मृतका के परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जाता या जल्द हायर सेंटर भेजा जाता, तो संभव है कि महिला और बच्चे की जान बचाई जा सकती थी। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने भी क्षेत्र में चिकित्सकों, स्वास्थ्य कर्मियों और आवश्यक सुविधाओं की कमी को लेकर नाराजगी जताई। आगे पढ़िए..

मोर्चरी की व्यवस्था को लेकर भी विवाद

परिजनों ने आरोप लगाया कि कर्णप्रयाग अस्पताल की मोर्चरी की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है और वहां अव्यवस्थाएं हैं। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने इन आरोपों का खंडन किया है।

अस्पताल प्रशासन ने क्या कहा?

चमोली उपजिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. बी.पी. पुरोहित ने बताया कि महिला और गर्भस्थ शिशु की मृत्यु अस्पताल पहुंचने से पहले ही हो चुकी थी। उन्होंने मोर्चरी में कीड़े होने के आरोपों को गलत बताया। उनके अनुसार, मोर्चरी का फ्रिज कुछ दिनों से खराब है और उसे ठीक कराने के लिए मैकेनिक को बुलाया गया है, जबकि अन्य व्यवस्थाएं सामान्य हैं।

क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की मांग

घटना के बाद स्थानीय लोगों ने कहा कि क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी लंबे समय से बनी हुई है। उनका कहना है कि सिमली स्थित महिला बेस अस्पताल में पर्याप्त डॉक्टर और स्टाफ उपलब्ध कराया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं से बचा जा सके।