उत्तराखंड में सात साल की बच्ची से दुष्कर्म के मामले में पॉक्सो कोर्ट ने आरोपी सूरज प्रकाश पोखरियाल को 20 साल के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: 20-Year Jail Term for Man Convicted of Raping Minor in Haridwar
हरिद्वार: नगर कोतवाली क्षेत्र में सात साल की नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म के मामले में विशेष न्यायालय पॉक्सो ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर उसे छह महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
20-Year Jail Term for Man Convicted of Raping Minor in Haridwar
मामला 16 जनवरी 2026 का है। पुलिस को दी गई तहरीर के अनुसार, सात वर्षीय बच्ची अकेली खेल रही थी। इसी दौरान पंडिताई का काम करने वाला आरोपी सूरज प्रकाश पोखरियाल कथित तौर पर बच्ची को बहला-फुसलाकर अपने साथ एक कमरे में ले गया, जहां उसके साथ दुष्कर्म किया गया। घटना के बाद बच्ची रोते हुए अपने परिजनों के पास पहुंची और उन्हें पूरी बात बताई। परिजनों ने तत्काल नगर कोतवाली पुलिस को लिखित तहरीर दी।
उसी दिन आरोपी की गिरफ्तारी
तहरीर मिलने के बाद नगर कोतवाली पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर तत्काल कार्रवाई की। पुलिस ने उसी दिन आरोपी सूरज प्रकाश पोखरियाल पुत्र वीरेंद्र पोखरियाल, निवासी घटियाली, पौड़ी, हाल निवासी भारत माता पुरम कॉलोनी, भूपतवाला, हरिद्वार को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया। पीड़िता का सरकारी अस्पताल में मेडिकल परीक्षण भी कराया गया।
महिला उपनिरीक्षक ने की विवेचना
नगर कोतवाली प्रभारी कुंदन सिंह राणा के नेतृत्व में पुलिस टीम गठित की गई। टीम ने मामले से जुड़े साक्ष्यों को जुटाया और विवेचना की प्रक्रिया पूरी की। मामले की विवेचक महिला उपनिरीक्षक निशा सिंह ने जांच पूरी करने के बाद 2 मार्च 2026 को आरोपी के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। इसके बाद मामले की सुनवाई विशेष न्यायालय पॉक्सो में हुई।
कोर्ट में मजबूत पैरवी, दोषी को 20 साल की सजा
मामले में नगर कोतवाली में तैनात कांस्टेबल संजीव बिष्ट ने न्यायालय में पुलिस की ओर से प्रभावी पैरवी की। दोनों पक्षों को सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद विशेष न्यायालय पॉक्सो ने सूरज प्रकाश पोखरियाल को दुष्कर्म का दोषी माना। अदालत ने उसे 20 साल के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं देने की स्थिति में दोषी को छह महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई को बताया न्याय का आधार
नगर कोतवाली प्रभारी कुंदन सिंह राणा के मुताबिक, मामले में आरोपी की गिरफ्तारी से लेकर आरोप पत्र दाखिल करने तक पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की। प्रभावी विवेचना, साक्ष्य संकलन और न्यायालय में मजबूत पैरवी के चलते करीब आठ महीने में फैसला आया।