वामन द्वादशी पर भगवान बदरी विशाल की उत्सव मूर्ति माता मूर्ति से मिलने माणा गांव के पास पहुंची, जहां विधि-विधान से पूजा हुई और धाम जयकारों से गूंज उठा। माता मूर्ति मेले के बाद बदरीनाथ मंदिर के कपाट फिर खोले गए
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: Badrinath Mata Murti Mela Held with Religious Traditions
चमोली: विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में माता मूर्ति का एक दिवसीय मेला धार्मिक उल्लास और श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ। वामन द्वादशी के अवसर पर भगवान बदरी विशाल की उत्सव मूर्ति अपने माता मूर्ति से मिलने माणा गांव के पास स्थित माता मूर्ति मंदिर पहुंची। इस दौरान श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की और बदरी विशाल के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।
Badrinath Mata Murti Mela Held with Religious Traditions
धार्मिक मान्यता के अनुसार हर साल वामन द्वादशी के दिन भगवान बदरी विशाल अपनी माता मूर्ति के दर्शन के लिए माणा गांव के सामने स्थित माता मूर्ति स्थान पर पहुंचते हैं। इस बार भी सुबह करीब 10 बजे बदरीनाथ मंदिर परिसर से भगवान बदरी विशाल की उत्सव मूर्ति को रावल ईश्वर प्रसाद नंबूदरी के संरक्षण में माता मूर्ति मंदिर के लिए रवाना किया गया। उत्सव मूर्ति को करीब तीन किलोमीटर की यात्रा पैदल तय कर माता मूर्ति पहुंचाया गया। वहां रावल ईश्वर प्रसाद नंबूदरी ने वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ माता मूर्ति की पूजा-अर्चना की।
सेना और ITBP के बैंड ने बांधा समां
माता मूर्ति पहुंचने के दौरान सेना और आईटीबीपी के बैंड की धुनें सुनाई दीं। श्रद्धालुओं ने भगवान बदरी विशाल के जयकारे लगाए। इस अवसर पर बदरी-केदार मंदिर समिति की ओर से माता मूर्ति के लिए राजभोग लगाया गया। पूजा के बाद राजभोग को प्रसाद के रूप में माणा गांव के ग्रामीणों को वितरित किया गया। वहीं, माणा गांव की महिलाओं ने पारंपरिक पौंणा नृत्य प्रस्तुत कर धार्मिक आयोजन में स्थानीय संस्कृति के रंग भी जोड़े। सेना और आईटीबीपी की ओर से श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन भी किया गया। आगे पढ़िए..
दोपहर 3 बजे संपन्न हुआ माता मूर्ति मेला
माता मूर्ति का एक दिवसीय मेला दोपहर करीब 3 बजे संपन्न हुआ। इसके बाद भगवान बदरी विशाल की उत्सव मूर्ति को वापस बदरीनाथ मंदिर लाया गया। मेले के चलते बदरीनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना सुबह करीब 9:30 बजे रोक दी गई थी। इसके बाद सुबह 10 बजे मंदिर के कपाट बंद कर उत्सव मूर्ति को माता मूर्ति के लिए रवाना किया गया। मेला संपन्न होने के बाद मंदिर के कपाट दोबारा खोल दिए गए।
नारायण पर्वत की तलहटी में है माता मूर्ति मंदिर
माता मूर्ति का मंदिर नारायण पर्वत की तलहटी में स्थित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार वामन द्वादशी के दिन माता मूर्ति के आमंत्रण पर भगवान बदरी विशाल उनसे मिलने पहुंचते हैं। इसी वजह से माता मूर्ति मेला बदरीनाथ धाम की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में शामिल माना जाता है। इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।
माता मूर्ति मेले के बाद रावल के लिए बदल जाती है मान्यता
माता मूर्ति से जुड़ी एक विशेष धार्मिक मान्यता बदरीनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी रावल से भी जुड़ी है। मान्यता के अनुसार बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के बाद से वामन द्वादशी तक रावल पंचशीला क्षेत्र में ही रहते हैं। इस अवधि में उनके आवागमन को लेकर विशेष धार्मिक मर्यादाएं मानी जाती हैं। मान्यता यह भी है कि इस अवधि में रावल किसी नदी को पार नहीं करते और धाम से बाहर आवागमन नहीं करते। वामन द्वादशी पर माता मूर्ति के दर्शन के बाद यह विशेष अवधि समाप्त मानी जाती है। इसके बाद रावल के लिए अन्य स्थानों पर आवागमन की अनुमति मानी जाती है।