उत्तराखंड के इस कॉलेज में 4 हजार वोटों के लिए डेढ़ करोड़ खर्च, नियम-कानून की उड़ी धज्जियां

Uttarakhand News: कॉलेज छात्रसंघ चुनाव में प्रचार और चुनावी गतिविधियों पर बड़े पैमाने पर खर्च का दावा सामने आया है। उपलब्ध अनुमान के मुताबिक करीब डेढ़ करोड़ रुपये खर्च होने की बात कही जा रही है।
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MBPG College Haldwani Election: MBPG College Election 1 Crore Spent Only 4063 Votes
Image: MBPG College Election 1 Crore Spent Only 4063 Votes

हल्द्वानी: हल्द्वानी के एमबीपीजी कॉलेज में छात्रसंघ चुनाव को लेकर प्रचार के दौरान काफी गतिविधियां देखने को मिलीं, लेकिन मतदान के आंकड़े अपेक्षाकृत कम रहे। कॉलेज में कुल 12,800 छात्र-छात्राएं मतदाता थे, जिनमें से सिर्फ 4,063 ने मतदान किया। इससे कुल मतदान प्रतिशत 31.74 रहा। यानी करीब 68 प्रतिशत छात्र-छात्राओं ने मतदान नहीं किया। पिछले वर्ष भी कॉलेज में मतदान प्रतिशत 25.75 फीसदी रहा था।

MBPG College Election: ₹1.5 Crore Spent, Only 4,063 Votes

रिपोर्ट के अनुसार, छात्रसंघ चुनाव में 72 प्रत्याशियों की ओर से चुनाव प्रचार और अन्य गतिविधियों में करीब डेढ़ करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है। यदि इस अनुमान को मतदान किए गए 4,063 वोटों से जोड़ा जाए तो एक वोट पर खर्च करीब ₹3,700 बैठता है। हालांकि, यह आंकड़ा अनुमानित खर्च है, न कि किसी आधिकारिक ऑडिट में प्रमाणित कुल खर्च।

लिंगदोह समिति की 50 हजार रुपये खर्च सीमा

छात्रसंघ चुनाव में लिंगदोह समिति की सिफारिशों के तहत प्रत्याशियों को निर्धारित खर्च सीमा का पालन करना होता है। कॉलेज प्राचार्य प्रो. एनएस बनकोटी के अनुसार, प्रत्याशियों ने ₹50 हजार तक खर्च करने का शपथ पत्र दाखिल किया था। वहीं, अत्यधिक खर्च को लेकर प्रत्याशियों की ओर से यह तर्क दिया जाता है कि कई खर्च उनके समर्थक करते हैं और वह रकम सीधे प्रत्याशियों की ओर से खर्च नहीं की जाती।

फ्रेशर पार्टी और म्यूजिकल फेस्ट पर लाखों का खर्च

रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव से करीब एक महीने पहले ही छात्रसंघ चुनाव का माहौल बनना शुरू हो गया था। फ्रेशर पार्टियों और गैदरिंग के आयोजन किए गए। इसके बाद प्रमुख पदों के प्रत्याशियों की ओर से फ्रेशर पार्टी और म्यूजिकल फेस्ट जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए। रिपोर्ट में इन आयोजनों पर करीब 60 से 65 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान बताया गया है। आगे पढ़िए..

पोस्टर-बैनर से लेकर यात्राओं तक खर्च

चुनाव प्रचार के दौरान पोस्टर, बैनर, होर्डिंग और पंपलेट पर भी खर्च किया गया। रिपोर्ट में इस मद में करीब 5 से 7 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसके अलावा समर्थकों को फिल्म दिखाने और विभिन्न स्थानों की यात्राएं कराने पर भी खर्च किए जाने का दावा किया गया है। इनमें पूर्णागिरि, हनुमान धाम और रामनगर जैसे स्थानों की यात्राएं शामिल बताई गई हैं। इस मद में करीब 8 से 10 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है।

खाना, वाहन और चुनाव कार्यालय पर भी खर्च

रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव प्रचार के दौरान भोजन, रेस्तरां में बैठकें, पेट्रोल, वाहनों, किराये के चुनाव कार्यालय और मतदान के दिन दूर-दराज के क्षेत्रों से विद्यार्थियों को लाने पर भी खर्च किया गया। इन सभी मदों को मिलाकर करीब 60 से 70 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान बताया गया है। इसके अलावा समर्थकों को पैसे बांटने के आरोप भी लगाए गए हैं, हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

छात्रसंघ चुनाव में कम मतदान ने उठाए सवाल

एमबीपीजी कॉलेज में इस बार मतदान प्रतिशत 31.74 रहा। चुनाव प्रचार के दौरान गतिविधियों के बावजूद बड़ी संख्या में विद्यार्थियों का मतदान से दूर रहना चर्चा का विषय बना है। कॉलेज में 12,800 मतदाताओं के बावजूद 4,063 वोट पड़ने से छात्रसंघ चुनाव में विद्यार्थियों की भागीदारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। वहीं, कुछ विद्यार्थियों ने चुनाव के दौरान कॉलेज में तनाव और बाहरी लोगों की मौजूदगी को लेकर भी अपनी चिंताएं जाहिर की हैं।

खर्च और चुनाव व्यवस्था पर क्या कहता है कॉलेज प्रशासन?

एमबीपीजी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. एनएस बनकोटी के अनुसार, प्रत्याशियों ने लिंगदोह समिति के नियमों के तहत ₹50 हजार तक खर्च करने का शपथ पत्र दिया था। अधिक खर्च के सवाल पर प्रत्याशियों की ओर से समर्थकों द्वारा खर्च किए जाने की बात कही जाती है। इस तरह एक तरफ चुनावी गतिविधियों में बड़े खर्च का अनुमान सामने आया है, जबकि दूसरी ओर आधिकारिक खर्च सीमा और वास्तविक चुनावी खर्च के बीच अंतर को लेकर सवाल बने हुए हैं।