Video: देवभूमि के गोलू देवता को समर्पित जागर, अब तक 9 लाख से ज्यादा लोगों ने देखा..देखिए

देवभूमि के गोलू देवता को समर्पित ये जागर जबसे आया है, तबसे लोगों की जुबान पर चढ़ा हुआ है। अब तक इसे 9 लाख से ज्यादा लोग देख चुके हैं..देखिए
Advertisement हजारों वर्षों से जलती अखंड ज्योति के सामने सात फेरे - आस्था, परंपरा और प्रकृति का अनोखा संगम

पहाड़, मंत्र और देवभूमि का आशीर्वाद.. त्रियुगीनारायण में शादी सिर्फ एक समारोह नहीं, आध्यात्मिक अनुभव है।

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Uttarakhand news: Darshan farswan presents new jagar song dadu goriya
Image: Darshan farswan presents new jagar song dadu goriya

: ये है पहाड़ की असल संस्कृति, ये है पहाड़ की असली परंपरा। हम धन्यवाद करना चाहते हैं युवा चेहरे दर्शन फरस्वाण का, जिन्होंने जागर की कला को जिंदा रखते हुए अद्भुत गीत पेश किया है। इस गीत को अब तक 9 लाख से ज्यादा लोग देख चुके हैं। उत्तराखंड के गोल्ज्यू महाराज के बारे में तो आप अच्छी तरह से जानते होंगे। उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में इन्हें गोल्ज्यू देवता और गढ़वाल क्षेत्र में गोरिल देवता के नाम से जाना जाता है। न्याय के देवता कहे जाने वाले गोल्ज्यू महाराज के कुछ पारंपरिक जागर भी हैं। लेकिन आपको ये जानकर हैरानी होगी कि ये जागर दर्शन फरस्वाण ने खुद लिखा है और खुद गाया है। सिर्फ दो हफ्तों के भीतर इस गीत को करीब ढाई लाख लोग पसंद कर चुके हैं। दर्शन फरस्वाण चमोली के थराली के सुदूर गांव रतगांव से ताल्लुक रखते हैं। पहाड़ के पारंपरिक गीत और संगीत की दीवानगी दर्शन में इतनी भरी है कि वो हर वक्त कुछ नया सोचते हैं और नया करते हैं।

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राज्य समीक्षा की टीम ने इस गीत के डायरेक्टर और प्रोड्यूसर कांता प्रसाद से बात की। कांता प्रसाद ने बताया कि उत्तराखंड में आज हर तरह के गीत तैयार हो रहे हैं और सबसे खास बात ये है कि युवा लड़के अपनी परंपराओं और अपनी जड़ों से जुड़ रहे हैं। जागर की कला उत्तराखंड की सबसे पुरानी संगीत विधा के रूप में जानी जाती है। कांता प्रसाद ने बताया कि वो खुश हैं कि लोगोंने इस गीत को हाथों हाथ लिया है और पसंद किया है। इससे पता चलता है कि आज के युवाओं में अपनी मिट्टी और संस्कृति से कितना गहरा जुड़ाव है। इस गीत को बेहद ही खूबसरूत लोकेशन में तैयार किया गया है। युद्धनीर नेगी का कैमरा वर्क जबरदस्त है। विनोद चौहान का संगीत कानों को सुकून दे रहा है। पवन गुसाईं, नीलम सकलानी, जयवीर डोगरा का काम भी कमाल का है।

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सवाल ये है भी कि आज का युवा अपने पारंपरिक संगीत से काफी दूर चला गया है। इसलिए युवाओं को अपनी परंपरा से जोड़ने की ये एक अद्भुत कोशिश कही जा सकती है। दर्शन फरस्वाण के लिए हम इतना ही कहेंगे कि इस तरह से ही कोशिश कीजिए और हर बार कुछ नया लाने की कोशिश करें। हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

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